Category: MP News

  • Devotion: भक्त नरसिंह का बाल जीवन और महान कथाएँ

    Devotion: भक्त नरसिंह का बाल जीवन और महान कथाएँ

    मध्य प्रदेश में नानीबाई को मायरो कथा का शुभारंभ

    मध्य प्रदेश के छावनी क्षेत्र स्थित श्री कुइया गार्डन में मंगलवार से नानीबाई को मायरो कथा का आयोजन शुरू हुआ। इस पवित्र अवसर के उपलक्ष्य में एक भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया गया, जो बड़ा बाजार स्थित श्री सत्यनारायण मंदिर से निकाली गई। इस यात्रा में क्षेत्रवासियों की बड़ी संख्या ने भाग लिया और पंडित संजय कृष्ण त्रिवेदी का स्वागत करते हुए उन पर पुष्प वर्षा की।

    इस कथा के पहले दिन, पंडित त्रिवेदी ने भक्त नरसिंह के पूर्व जन्म की कथा का वाचन किया। शोभायात्रा दोपहर 12 बजे शुरू हुई और कथास्थल पर पहुँचकर समाप्त हुई। इस तीन दिवसीय कथा का समापन **25 दिसंबर** को होगा। कथा के दौरान भक्त नरसिंह के बाल जीवन, शिव और कृष्ण के प्रसंग, और नानीबाई को मायरो की कथा का वर्णन किया जाएगा। कथा का समय दोपहर 2 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक निर्धारित किया गया है।

    भक्तों का उत्साह और सामूहिक भक्ति का महत्व

    इस मौके पर उपस्थित महिलाओं में कथा को लेकर उत्साह का माहौल देखा गया। एक भक्त महिला ने कहा कि कुइया परिवार द्वारा यह तीसरा अवसर है जब इस प्रकार का सत्संग आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “सत्संग का मतलब है हम सब मिलकर भक्ति भाव से ईश्वर की प्रार्थना करें। जहां भी सत्संग हो, हमें कुछ समय अवश्य देना चाहिए। मानव जीवन को भगवान की सेवा में लगाना चाहिए और थोड़ा-बहुत पुण्य दान भी करते रहना चाहिए ताकि मानव जीवन का उद्धार हो सके और सभी का कल्याण हो।”

    कथा के आयोजक और पंडित संजय कृष्ण त्रिवेदी ने भी भक्तों को कथा के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों में भाग लेने से न केवल आत्मिक शांति मिलती है, बल्कि सामाजिक एकता भी बढ़ती है। इस प्रकार के आयोजनों से क्षेत्र के लोग एकजुट होते हैं और आपस में भाईचारे का भाव पैदा होता है।

    कथा के दौरान की जाने वाली विशेषताएँ

    • कथा का आयोजन तीन दिनों तक चलेगा, जिसमें विभिन्न धार्मिक प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा।
    • भक्त नरसिंह के बाल जीवन और अन्य महत्वपूर्ण प्रसंगों को सुनने का अवसर मिलेगा।
    • कथा का समय: **दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे** तक।
    • सामूहिक भक्ति और ईश्वर की प्रार्थना के महत्व पर जोर दिया जाएगा।

    धार्मिक आयोजनों का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इस प्रकार के कार्यक्रम न केवल धार्मिक आस्था को बढ़ावा देते हैं, बल्कि लोगों को एक साथ लाने का कार्य भी करते हैं। सत्संग में भाग लेकर लोग अपने जीवन में सकारात्मकता और शांति का अनुभव करते हैं। इस कथा का आयोजन भी इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए किया गया है।

    सामाजिक एकता और सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण

    कथा के आयोजकों ने इस बात पर भी जोर दिया कि धार्मिक आयोजनों में भागीदारी से न केवल व्यक्तिगत भक्ति में वृद्धि होती है, बल्कि यह सामाजिक एकता को भी मजबूत बनाता है। जब लोग एक साथ मिलकर भक्ति करते हैं, तो यह न केवल उनके धार्मिक अनुभव को समृद्ध करता है, बल्कि समाज में भाईचारे का भी निर्माण करता है।

    इस कथा के माध्यम से क्षेत्रवासियों को एकत्रित किया गया है ताकि वे अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित कर सकें। आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार के आयोजनों से नई पीढ़ी को भी अपनी धार्मिक परंपराओं से जोड़ने में मदद मिलेगी।

    इस तरह के धार्मिक आयोजन न केवल आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि समाज में एकता, प्रेम और भाईचारे का संदेश भी फैलाते हैं। उम्मीद की जा रही है कि इस कथा का आयोजन सभी के लिए लाभकारी सिद्ध होगा और भक्तों को अध्यात्म की ओर प्रेरित करेगा।

    मध्य प्रदेश की अन्य ख़बरें पढ़ें

  • Bus Accident: चालक ने खोया संतुलन, बाइक सवार को जेसीबी से निकाला

    Bus Accident: चालक ने खोया संतुलन, बाइक सवार को जेसीबी से निकाला

    मध्य प्रदेश: बस दुर्घटना में 35 यात्री घायल, एक की मौत

    भास्कर संवाददाता | सलकनपुर/सीहोर

    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल जा रही एक यात्री बस मंगलवार सुबह लगभग 10 बजे अचानक अनियंत्रित हो गई। यह घटना सलकनपुर नहर तिराहे पर हुई, जहां बस एक पुलिया से टकराते हुए स्पिल वाल पर चढ़ गई। इस दुर्घटना में 35 यात्री घायल हुए हैं, जिनमें से 14 की हालत गंभीर है। एक यात्री की गंभीर हालत में भोपाल में मौत भी हो गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बस तेज रफ्तार से चल रही थी और अचानक एक बाइक उसके सामने आ गई, जिसको बचाने की कोशिश में ड्राइवर ने बस का संतुलन खो दिया।

    बस के पुलिया से टकराने के बाद उसका अगला हिस्सा नहर की स्पिल में घुसकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। राहत की बात यह रही कि बस नहर में गिरने से बच गई। बाइक पर सवार दो लोगों में से एक की मृत्यु हो गई, जबकि दूसरे की हालत नाजुक बताई जा रही है। हादसे के बाद बस में सवार 13 अन्य यात्रियों को भी गंभीर हालत में भोपाल रेफर किया गया। चौहान ट्रेवल्स की यह बस हरदा से भोपाल की ओर जा रही थी। दुर्घटना के तुरंत बाद, घायलों को रेहटी के स्वास्थ्य केंद्र पर प्राथमिक उपचार दिया गया।

    दुर्घटना के समय की स्थिति और रेस्क्यू ऑपरेशन

    108 एंबुलेंस के पहुंचने में देरी के चलते, पुलिस ने अपने वाहन से घायलों को अस्पताल भेजने का निर्णय लिया। दुर्घटना के बाद घटनास्थल पर यात्रियों की चीखें गूंजने लगीं। स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों ने तत्परता दिखाते हुए घायलों को बस से बाहर निकालने का कार्य किया और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और घायलों को रेहटी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने 108 पर कॉल किया था, लेकिन एंबुलेंस काफी देर तक नहीं आई। ऐसे में पुलिस ने अपने वाहन से ही घायल यात्रियों को स्वास्थ्य केंद्र भेजा। बाइक सवार 25 वर्षीय अरविंद बस के नीचे दब गया था, जिसे स्थानीय लोगों ने जेसीबी की सहायता से बाहर निकाला। रेहटी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. अश्वनी दायमा ने बताया कि अरविंद को हमीदिया अस्पताल रेफर किया गया था, लेकिन वहां पहुंचते ही उसकी मृत्यु हो गई। दूसरे गंभीर घायल राजू (33) निवासी सुल्तानपुर की हालत नाजुक बनी हुई है।

    चौहान ट्रेवल्स की बसों में लगातार दुर्घटनाएं

    दुर्भाग्यवश, यह घटना पहली बार नहीं हुई है। एक दिन पहले ही, सोमवार रात को भी चौहान ट्रेवल्स की एक बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। उस समय बस सलकनपुर से लगभग 400 मीटर पहले डामर प्लांट के पास एक डंपर से टकरा गई थी, लेकिन उस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई थी। ड्राइवर का कहना था कि सामने से आ रहा डंपर का चालक नशे में था, जिसने अचानक बस में टक्कर मार दी। उस समय बस का कांच टूटने से चार यात्रियों को मामूली चोटें आई थीं।

    मध्य प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं की alarming संख्या

    हाल ही में, एंबुलेंस 108 ने जनवरी से अक्टूबर 2025 तक की सड़क हादसों की संख्या को सार्वजनिक किया है, जिसमें यह बात सामने आई है कि 10 महीनों में जिले में **3280 सड़क हादसे** हुए हैं। इसका मतलब यह है कि हर दिन **10 से 12 सड़क हादसे** होना आम बात है। इन हादसों में गंभीर चोटों और चिकित्सा के अभाव के कारण **3% लोगों** की जान भी गई है।

    एंबुलेंस 108 के आंकड़ों के अनुसार, सड़क हादसों में सबसे अधिक खतरा युवाओं को है। **15 से 30 साल** के आयु वर्ग में **61% युवा** दुर्घटनाग्रस्त हुए हैं। वहीं, **31 से 45 वर्ष** के **25% लोग** भी एक्सीडेंट का शिकार हुए हैं। इसके अतिरिक्त, **15 साल से कम** उम्र के **4%** और **60+ उम्र** के **2% बुजुर्ग** भी हादसों में घायल हुए हैं। इस प्रकार, इन दुर्घटनाओं की मुख्य वजह तेज रफ्तार मानी जा रही है।

    MP News in Hindi

  • Sand News: दतिया में रेत से भरी 3 ट्रॉली जब्त, प्रभारी ने कहा खाली

    Sand News: दतिया में रेत से भरी 3 ट्रॉली जब्त, प्रभारी ने कहा खाली

    मध्य प्रदेश में अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ कार्रवाई

    मध्य प्रदेश के सेंवढ़ा थाना क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की गई है। शनिवार को एसडीओपी अजय चानना ने गोविंद नगर वन परिक्षेत्र में इस कार्रवाई का नेतृत्व किया। इस दौरान लांच पुलिस ने रेत से भरी तीन ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉली को जब्त किया। यह कार्रवाई रेत के अवैध उत्खनन पर नियंत्रण लगाने के लिए की गई है, जो राज्य में एक गंभीर समस्या बनती जा रही है।

    खानिज उड़नदस्ता प्रभारी रामसिया गौड़ को इन जब्त ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को सौंपा गया। लेकिन बाद में आरोप लगाया गया कि उड़नदस्ता दल ने मौके पर एक खाली ट्रैक्टर-ट्रॉली पर कार्रवाई की, जबकि रेत से भरी तीनों ट्रैक्टर-ट्रॉलियाँ मौके से गायब हो गईं। इस घटना ने स्थानीय समुदाय में कई सवाल उठाए हैं और अवैध खनन के खिलाफ उठाए जा रहे कदमों पर संदेह पैदा कर दिया है।

    उड़नदस्ता टीम की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

    इस मामले में खाली ट्रैक्टर-ट्रॉली के चालक राजेश ने कहा कि वह पेट्रोल पंप पर खड़ा था, और तभी उड़नदस्ता टीम ने उसके ट्रैक्टर को पकड़ लिया। राजेश ने बताया कि रेत से भरी ट्रॉलियों को छोड़ दिया गया, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या वास्तव में कार्रवाई की गई या केवल दिखावा किया गया। इस पर एसडीओपी अजय चानना ने कहा कि कलेक्टर ने उड़नदस्ता टीम का गठन किया था, जिसमें प्रभारी रामसिया गौड़ शामिल थे।

    अजय चानना ने इस मामले में बताया, “हमने अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। हमारी टीम ने मौके पर कार्रवाई की और यह सुनिश्चित किया कि कोई भी अवैध गतिविधि ना हो।” हालांकि, रामसिया गौड़ ने इस बात का खंडन किया कि वह उस कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद थे और कहा कि वे खनिज विभाग के प्रतिनिधि नहीं हैं।

    स्थानीय समुदाय की प्रतिक्रियाएं

    स्थानीय लोगों ने इस घटना को लेकर चिंता व्यक्त की है। कुछ लोगों का मानना है कि प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई केवल एक दिखावा है और वास्तविकता में अवैध रेत उत्खनन पर कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं है। स्थानीय निवासी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “यह कोई नई बात नहीं है। हम हमेशा देखते हैं कि कैसे अवैध रेत का उत्खनन किया जाता है और प्रशासन केवल आंखें मूंद लेता है।”

    ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन वास्तव में अवैध खनन पर नियंत्रण पाने के लिए गंभीर है या यह केवल एक कार्यवाही का दिखावा है। स्थानीय निवासियों की नाराजगी प्रशासन के खिलाफ एक बड़ा सबूत है कि अवैध खनन के खिलाफ उठाए गए कदम पूरी तरह से प्रभावी नहीं हो रहे हैं।

    आगे की योजनाएं और कार्रवाई

    प्रशासन ने इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करते हुए आगे की योजनाएं बनाने का आश्वासन दिया है। कलेक्टर ने कहा है कि अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई को और अधिक सख्त किया जाएगा। इसके लिए विशेष टीमों का गठन किया जाएगा और नियमित रूप से छापे मारे जाएंगे। इसके अलावा, स्थानीय लोगों को भी इस मुद्दे पर जागरूक करने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

    अधिकारियों का कहना है कि अवैध रेत उत्खनन केवल पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि यह राज्य के राजस्व को भी प्रभावित करता है। इसलिए, प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेकर काम कर रहा है और सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस पर ध्यान दें।

    इस प्रकार, मध्य प्रदेश में अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ उठाए गए कदमों को देखकर यह कहा जा सकता है कि प्रशासन सख्त कदम उठाने के लिए तत्पर है, लेकिन वास्तविकता में इसे सफल बनाने के लिए और भी अधिक प्रयासों की आवश्यकता है।

    मध्य प्रदेश की ताजा खबरें

  • Conversion: शिवपुरी में 25 हजार में धर्मांतरण, 3 शिक्षक और पादरी गिरफ्तार

    Conversion: शिवपुरी में 25 हजार में धर्मांतरण, 3 शिक्षक और पादरी गिरफ्तार

    मध्य प्रदेश में धर्मांतरण का मामला: पांच आरोपी गिरफ्तार

    मध्य प्रदेश के बदरवास तहसील में हाल ही में धर्मांतरण के एक गंभीर मामले का खुलासा हुआ है, जहां पुलिस ने दो सरकारी शिक्षिकाओं, एक शिक्षक, एक पटवारी और एक पादरी के खिलाफ कार्यवाही करते हुए सभी को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई ग्राम पंचायत सरपंच की शिकायत के आधार पर की गई थी। पुलिस ने बताया कि आरोपियों पर ग्रामीणों को 25-25 हजार रुपए का लालच देकर ईसाई धर्म में धर्मांतरण कराने का आरोप है।

    ग्राम घूघला के सरपंच हमीर सिंह भील ने 22 दिसंबर को इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद बदरवास थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया। बताया जा रहा है कि यह मामला न केवल स्थानीय ग्रामीणों के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक चिंता का विषय बन गया है। इस मामले में न्याय प्रणाली के तहत उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए पुलिस ने विवेचना शुरू कर दी है।

    धर्मांतरण के खिलाफ मप्र धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021

    मध्य प्रदेश में धर्मांतरण से संबंधित मामलों को नियंत्रित करने के लिए मप्र धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021 लागू किया गया है। इस अधिनियम की धारा 3 और 5 के तहत यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो दोषी को 2 साल से लेकर 10 साल तक की सजा हो सकती है, साथ ही 50 हजार रुपए तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। यह कानून यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी व्यक्ति को धर्मांतरण के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है और यह धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है।

    इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए एसपी शिवपुरी, अमनसिंह राठौड़ ने कहा कि “धर्मांतरण मामले में एफआईआर के बाद पांच आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। कोर्ट में पेशी के बाद सभी को जेल भेजा गया है। विवेचना जारी है।” इस प्रकार की घटनाएं न केवल स्थानीय समुदाय में तनाव पैदा कर सकती हैं, बल्कि सामाजिक समरसता को भी प्रभावित कर सकती हैं।

    स्थानीय समुदाय की प्रतिक्रिया

    इस घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों में चिंता और भय का माहौल है। कई ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें इस प्रकार के लालच से बचने के लिए जागरूक होना चाहिए। सरपंच हमीर सिंह भील ने कहा कि “हमने अपने गांव में इस तरह की गतिविधियों को रोकने के लिए सभी को जागरूक किया है। हमें अपने धर्म और संस्कृति की रक्षा करनी है।” स्थानीय लोगों ने पुलिस की कार्रवाई की सराहना की है और उम्मीद जताई है कि इस मामले में उचित न्याय मिलेगा।

    धर्मांतरण के इस मामले ने न केवल बदरवास बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में चर्चा का विषय बना दिया है। कई सामाजिक संगठनों ने इस प्रकार की गतिविधियों के खिलाफ जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला किया है। उनका मानना है कि समाज में इस तरह के मामलों की रोकथाम के लिए शिक्षा और जागरूकता बहुत जरूरी है।

    उपसंहार

    धर्मांतरण के मामले में पुलिस की कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहा है। समाज में इस तरह की गतिविधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों को भी इस मामले में जागरूक किया जा रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके। यह घटना न केवल एक कानूनी मुद्दा है, बल्कि यह सामाजिक एकता और समानता के लिए भी बड़ा प्रश्न चिन्ह है।

    इस प्रकार, मध्य प्रदेश में धर्मांतरण के इस मामले ने कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं, और यह देखना होगा कि आगे इस मामले में न्याय प्रणाली किस प्रकार से कार्य करती है।

    मध्य प्रदेश की अन्य खबरों के लिए यहां क्लिक करें

  • Surgery: एम्स में जटिल सर्जरी, दाईं किडनी व आंतों को ग्राफ्ट कर जोड़ा गया

    Surgery: एम्स में जटिल सर्जरी, दाईं किडनी व आंतों को ग्राफ्ट कर जोड़ा गया

    एम्स में जटिल सर्जरी से युवक की जान बचाई गई

    मध्य प्रदेश के एम्स में एक 35 वर्षीय युवक ने आठ महीने से पेट दर्द की समस्या के साथ चिकित्सा सुविधा का सहारा लिया। इस युवक ने कई अस्पतालों का दौरा किया, लेकिन उसे कहीं से भी सटीक उपचार नहीं मिला। अंततः जब वह एम्स पहुंचा, तो वहां की जांच में पता चला कि उसे सुप्रा-रीनल एब्डोमिनल एऑर्टिक एन्यूरिज्म नामक गंभीर बीमारी है।

    बीमारी का खतरा और इसके लक्षण

    सुप्रा-रीनल एब्डोमिनल एऑर्टिक एन्यूरिज्म का अर्थ है कि पेट के अंदर खून पहुंचाने वाली मुख्य नस, जो महाधमनी कहलाती है, वह गुब्बारे की तरह फूल गई थी। यह सूजन केवल नस तक सीमित नहीं थी, बल्कि आंतों और दोनों किडनियों तक जाने वाली धमनियों में भी फैल चुकी थी। इस स्थिति में बाईं किडनी पूरी तरह से खराब हो चुकी थी, जिससे मरीज की जान को खतरा बढ़ गया था।

    एम्स के डॉक्टरों द्वारा जटिल सर्जरी की योजना

    एम्स के चिकित्सकों ने इस गंभीर स्थिति का सामना करने के लिए एक अत्यधिक जटिल और दुर्लभ सर्जरी करने की योजना बनाई। कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग ने सूजनग्रस्त महाधमनी की सर्जरी को सफलतापूर्वक संपन्न किया, जिससे मरीज की जान को बचाया जा सका। यह बीमारी इतनी खतरनाक थी कि किसी भी समय महाधमनी फटने के कारण मरीज की जान जा सकती थी। इसलिए, सीटीवीएस विभाग के विशेषज्ञों ने तत्काल सर्जरी का निर्णय लिया।

    सर्जरी की प्रक्रिया

    इस जटिल सर्जरी के दौरान पेट और छाती दोनों रास्तों से चीरा लगाकर सूजनग्रस्त महाधमनी को पूरी तरह से हटाया गया। इसके बाद उसकी जगह एक ग्राफ्ट (कृत्रिम रक्त नली) लगाई गई। इसके साथ ही, खराब हो चुकी बाईं किडनी को भी निकालना पड़ा। दाईं किडनी और आंतों की प्रमुख धमनियों को ग्राफ्ट में पुनः जोड़ा गया। यह प्रक्रिया चिकित्सा क्षेत्र में सबसे जटिल मानी जाती है।

    सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति

    करीब छह घंटे तक चली इस सर्जरी के बाद मरीज को आईसीयू में रखा गया, जहां उनकी हालत स्थिर रही। अच्छी खबर यह है कि अब मरीज पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके हैं। यह हाई-रिस्क सर्जरी सीटीवीएस विभाग के प्रमुख डॉ. योगेश निवारिया के नेतृत्व में की गई। इस टीम में डॉ. एम. किशन, डॉ. सुरेंद्र सिंह यादव, डॉ. राहुल शर्मा, डॉ. विक्रम वट्टी और डॉ. आदित्य सिरोही शामिल थे। इसके अलावा, यूरोलॉजी विभाग से डॉ. माधवन और डॉ. केतन मेहरा, एनेस्थीसिया से डॉ. हरीश तथा सर्जिकल ऑन्कोलॉजी से डॉ. अंकित जैन भी इस सर्जरी में शामिल रहे।

    समाज को जागरूक करने की आवश्यकता

    इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि समय पर चिकित्सा सहायता लेना कितना महत्वपूर्ण है। युवा मरीज की जान बचाने के लिए एम्स के चिकित्सकों की तत्परता और कुशलता सराहनीय है। इस प्रकार की जटिल बीमारियों के प्रति जागरूकता फैलाना और समय पर उचित चिकित्सा सुविधा का लाभ उठाना हर व्यक्ति के लिए आवश्यक है।

    नीति और स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रभाव

    इस घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि हमारी स्वास्थ्य सेवाओं में इतनी क्षमता है कि जटिल से जटिल मामलों का सामना किया जा सके। हालांकि, समय पर रोग का निदान और उपचार न होने पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि वे ऐसी बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कार्यक्रम आयोजित करें, ताकि लोग समय रहते चिकित्सकीय मदद ले सकें।

    कुल मिलाकर, एम्स में की गई इस सफल सर्जरी ने न केवल एक जीवन को बचाया है, बल्कि समाज में चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता और विशेषज्ञता को भी उजागर किया है।

    मध्य प्रदेश की अन्य समाचारों के लिए यहां क्लिक करें

  • Water News: संपतिया उइके ने जल जीवन मिशन घोटाले के आरोपी को हटाया

    Water News: संपतिया उइके ने जल जीवन मिशन घोटाले के आरोपी को हटाया

    मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन की उपलब्धियों पर चर्चा

    मध्य प्रदेश के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की राज्यमंत्री संपतिया उइके ने हाल ही में अपने विभाग की दो वर्षों की उपलब्धियों को लेकर मीडिया के सामने जानकारी साझा की। इस मौके पर उन्होंने जल जीवन मिशन के तहत किए गए कार्यों का भी जिक्र किया। उल्लेखनीय है कि इस मिशन के तहत करोड़ों रुपए के घोटाले में आरोपी इंजीनियर संजय कुमार अंधवान के संबंध में पूछे गए सवाल पर उन्होंने संजीदगी से जवाब दिया।

    उइके ने स्पष्ट किया कि जिन ठेकेदारों ने गड़बड़ी की है, उन्हें बड़ी संख्या में ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों और संबंधित ठेकेदारों पर कार्यवाही की जा सके।

    जल जीवन मिशन के तहत उपलब्धियां

    संपतिया उइके ने अपने कार्यकाल के दौरान हुई प्रगति को साझा करते हुए बताया कि मध्य प्रदेश में 13.69 लाख सक्रिय घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। इसके साथ ही, 10,440 गांवों में हर घर को जल पहुंचाने का कार्य सफलतापूर्वक किया गया है। इसके अतिरिक्त, 24 घंटे पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 64 गांवों में पायलट प्रोजेक्ट का संचालन किया जा रहा है।

    उइके ने बताया कि इस दौरान 15,238 नए नलकूप और हैंडपंप भी स्थापित किए गए हैं, जिससे जल संकट को काफी हद तक कम किया गया है। उन्होंने कहा कि इन सभी प्रयासों के माध्यम से सरकार जल जीवन मिशन के अंतर्गत अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    लक्ष्य पूरा करने की समय सीमा

    जब दैनिक भास्कर ने मंत्री से पूछा कि मिशन का लक्ष्य क्या है और इसे पूरा करने की समय सीमा कब है, तो उन्होंने बताया कि हम अपने निर्धारित लक्ष्यों के करीब पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा, “हमारा मिशन पूरे मध्य प्रदेश में हर घर को जल पहुंचाना है, जो कि 2028 तक पूरा किया जाना है। लेकिन हम इसे 2027 में ही पूरा करने का लक्ष्य रखते हैं।”

    उइके की इस घोषणा से यह स्पष्ट होता है कि मध्य प्रदेश सरकार जल जीवन मिशन को लेकर कितनी गंभीर है और इसे प्राथमिकता में रखकर कार्य कर रही है। उनके नेतृत्व में विभाग ने जो उपलब्धियां हासिल की हैं, वे निश्चित रूप से राज्य के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होंगी।

    जल संकट का समाधान और भविष्य की योजनाएं

    मध्य प्रदेश में जल संकट एक गंभीर समस्या रही है, और सरकार इसे हल करने के लिए विभिन्न पहल कर रही है। उइके ने कहा कि विभाग लगातार प्रयास कर रहा है कि जल संसाधनों का सही उपयोग हो और सभी नागरिकों को पर्याप्त जल मिल सके। इसके लिए उन्होंने विभिन्न योजनाओं का भी जिक्र किया, जिनमें जल संरक्षण और पुनर्चक्रण के उपाय शामिल हैं।

    • जल संरक्षण के लिए जागरूकता अभियान चलाना
    • नए जल स्रोतों की पहचान और विकास
    • पुनर्चक्रण के माध्यम से जल का सही उपयोग

    सरकार की इस पहल से न केवल जल संकट को कम किया जा सकेगा, बल्कि यह ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी साबित होगा। मंत्री ने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में जल जीवन मिशन के तहत और भी बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे।

    मध्य प्रदेश की सरकार द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की जा रही है और सभी की निगाहें अब 2027 के लक्ष्य पर हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार अपने समयसीमा में इस महत्वपूर्ण मिशन को पूरा कर पाएगी।

    मध्य प्रदेश की सभी खबरें हिंदी में पढ़ें

  • Renovation: धर्मेंद्र भाव सिंह का कहना है, SPA जर्जर मंदिरों की कर रहा मदद

    Renovation: धर्मेंद्र भाव सिंह का कहना है, SPA जर्जर मंदिरों की कर रहा मदद

    मध्य प्रदेश में मंदिरों के पुनरुद्धार की नई पहल

    मध्य प्रदेश में धार्मिक आस्था के प्रतीक जीर्ण-शीर्ण मंदिरों के पुनरुद्धार के प्रयासों में स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (SPA) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। राज्य के धर्मस्व विभाग और SPA के बीच सहयोग से विरासत संरक्षण, रेट्रोफिटिंग और स्मारकों के पुनर्वास की दिशा में काम किया जा रहा है। यह योजना न केवल मंदिर परिसरों को सहेजने की दिशा में है, बल्कि धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग के दायरे में आने वाले अन्य स्मारकों के संरक्षण के लिए भी है।

    राज्य मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने मंगलवार को अपने कार्यकाल के दो साल पूरे होने पर इस पहल की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस योजना के अंतर्गत कई मंदिरों के जीर्णोद्धार का काम चल रहा है, जिससे न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय विकास में भी योगदान मिलेगा।

    जीर्णोद्धार की प्रक्रिया: 25 मंदिरों पर कार्य जारी

    मंत्री लोधी ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 400 से अधिक होम स्टे का निर्माण शुरू किया गया है। इससे ग्रामीण परिवारों को लगभग 7 करोड़ रुपये का व्यवसाय हुआ है। सरकार का लक्ष्य एक हजार होम स्टे का निर्माण करना है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही, पर्यटन पर आयोजित कार्यक्रमों से 10 हजार करोड़ रुपये का निवेश प्राप्त हुआ है, जो प्रदेश की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

    हाल ही में एक करार के बाद, जिलों से मिलने वाले मंदिरों के जीर्णोद्धार प्रस्ताव अब धर्मस्व विभाग SPA को भेज रहा है। अब तक कुल 64 मंदिरों के प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं, जिनमें से लगभग 25 मंदिरों पर प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा, 4 से 5 मंदिरों पर SPA की सहमति प्राप्त हो चुकी है। इस प्रक्रिया के माध्यम से, राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि धार्मिक स्थलों का संरक्षण किया जाए और उन्हें पुनर्जीवित किया जाए।

    धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विकास

    मध्य प्रदेश की सरकार का यह प्रयास न केवल धार्मिक स्थलों के संरक्षण के लिए है, बल्कि यह स्थानीय समुदायों के लिए भी अवसर पैदा कर रहा है। ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए जो होम स्टे बनाए जा रहे हैं, वे स्थानीय लोगों को रोजगार प्रदान कर रहे हैं। इसके साथ ही, यह पर्यटकों को भी मध्य प्रदेश की समृद्ध संस्कृति और विरासत से जोड़ने का एक माध्यम बन रहा है।

    इन प्रयासों से राज्य में न केवल धार्मिक स्थलों की पहचान बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। मंत्री लोधी ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार का उद्देश्य केवल मंदिरों के जीर्णोद्धार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे एक व्यापक दृष्टिकोण के तहत देखा जा रहा है, जिसमें सांस्कृतिक संरक्षण, पर्यटन विकास और समुदाय की भागीदारी शामिल है।

    भविष्य की योजनाएं और उम्मीदें

    मध्य प्रदेश सरकार का यह कदम एक नई दिशा में अग्रसर होने का संकेत है, जहां धार्मिक स्थलों के संरक्षण के साथ-साथ, स्थानीय समुदायों को भी विकास के नए अवसर मिलेंगे। मंत्री लोधी ने कहा कि आने वाले समय में और भी कई योजनाएं बनाई जाएंगी, जिससे न केवल मंदिरों का पुनरुद्धार होगा, बल्कि राज्य के पर्यटन क्षेत्र को भी नया जीवन मिलेगा।

    इस प्रकार, मध्य प्रदेश में धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार और विकास की यह पहल न केवल धार्मिक आस्था को सहेजने का प्रयास है, बल्कि यह सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और स्थानीय विकास का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। सरकार की इस दिशा में की जा रही कोशिशों से उम्मीद की जा रही है कि प्रदेश में पर्यटन को नया आकार मिलेगा और स्थानीय लोगों को आर्थिक लाभ प्राप्त होगा।

    मध्य प्रदेश की ताज़ा खबरें

  • Study Alert: नई मुश्किल, प्रोफेसर बोले पढ़ाई और नैक ग्रेडिंग पर असर पड़ेगा

    Study Alert: नई मुश्किल, प्रोफेसर बोले पढ़ाई और नैक ग्रेडिंग पर असर पड़ेगा

    मध्य प्रदेश में छात्रों के लिए हॉस्टल आवास का संकट

    मध्य प्रदेश सरकार ने मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय (एमवीएम) सहित तीन सरकारी कॉलेजों के छात्रों को हॉस्टल से बाहर निकालने की योजना बनाई है। उच्च शिक्षा विभाग ने गोपाल कृष्ण गोखले हॉस्टल को संस्कृति विभाग के अधीन वीर भारत न्यास को सौंपने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के बाद छात्रों में चिंता का माहौल व्याप्त हो गया है, क्योंकि इससे उनकी पढ़ाई और आवास की स्थिति पर गंभीर असर पड़ेगा।

    एमवीएम की प्राचार्य, डॉ. गीता मोदी ने मंगलवार को स्टाफ काउंसिल की बैठक बुलाई, जिसमें लगभग 65 प्रोफेसर शामिल हुए। करीब दो घंटे तक चली इस बैठक में सभी ने एकमत होकर निर्णय लिया कि राज्य शासन को पत्र लिखकर इस फैसले की समीक्षा करने की मांग की जाएगी। प्रोफेसरों का मानना है कि यह कदम छात्रों के लिए न केवल आवास की समस्या खड़ी करेगा, बल्कि उनकी पढ़ाई में भी बाधा डालेगा।

    हॉस्टल की स्थिति और छात्रों का संकट

    डॉ. गीता मोदी ने बताया कि वर्तमान में एमवीएम के पास केवल एक ही हॉस्टल बचा है, जिसमें शासकीय हमीदिया कॉलेज और शासकीय नवीन कॉलेज के 50 से अधिक छात्र रह रहे हैं। इस हॉस्टल की मासिक फीस मात्र **800 रुपये** है, और छात्रों को भोजन की व्यवस्था स्वयं करनी होती है। गोखले हॉस्टल के हस्तांतरण से इन छात्रों के सामने गंभीर आवासीय संकट उत्पन्न हो जाएगा।

    • वैकल्पिक व्यवस्था का प्रस्ताव – उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेज को सूचित किया है कि वर्तमान में संचालित गोखले हॉस्टल को संस्कृति विभाग के वीर भारत न्यास को सौंपने की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए शासन ने छात्र आवास के लिए किसी नए स्थानांतरण की व्यवस्था के लिए **29 दिसंबर** तक का समय मांगा है।
    • प्रोफेसरों की चिंता – स्टाफ काउंसिल की बैठक में प्रोफेसरों ने चिंता व्यक्त की कि हॉस्टल में मुख्यतः ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्र अध्ययन करते हैं। यदि उन्हें यह सुविधा छीन ली गई, तो उनकी पढ़ाई पर नकारात्मक असर पड़ेगा, जिससे कॉलेज की नैक ग्रेडिंग में सुधार की संभावनाएं भी खत्म हो जाएंगी। इसके परिणामस्वरूप, छात्र संख्या में भी कमी आएगी।

    संस्थान की सुरक्षा को खतरा

    बैठक में यह मुद्दा भी उठाया गया कि लाइब्रेरी के पीछे की जमीन पहले ही एमपी टूरिज्म को सौंपी जा चुकी है। इसके अलावा, उच्च शिक्षा विभाग के क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक कार्यालय के लिए भी कॉलेज परिसर की जमीन दी गई है। प्रोफेसरों ने चेतावनी दी कि यदि यह सिलसिला नहीं रुका, तो भविष्य में यह शैक्षणिक संस्थान बर्बादी की कगार पर पहुंच जाएगा।

    एक लाइन में 3 हॉस्टल थे, अब एक भी नहीं बचेगा – छोटे तालाब किनारे एमवीएम के दो हॉस्टल (गोपाल कृष्ण गोखले हॉस्टल और मदन मोहन मालवीय हॉस्टल) हैं। वर्तमान में मालवीय हॉस्टल में शासकीय नवीन कॉलेज संचालित हो रहा है। गोखले हॉस्टल में पहले शासकीय श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज चलता था, लेकिन कॉलेज के कोलार स्थानांतरित होने के बाद यह हॉस्टल एमवीएम को वापस मिल गया था। अब इसे भी अन्य संस्थान को देने की तैयारी की जा रही है।

    राज्य शासन को अवगत कराने की प्रक्रिया

    गोखले हॉस्टल को लेकर शासन से प्राप्त पत्र के संबंध में स्टाफ काउंसिल की बैठक बुलाई गई थी। बैठक में लिए गए निर्णय को राज्य शासन के समक्ष रखा जाएगा। इस संदर्भ में डॉ. गीता मोदी ने कहा, “हम शासन को अपनी चिंताओं से अवगत कराएंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि छात्रों के हितों की रक्षा की जाए।”

    इस प्रकार, एमवीएम के छात्र और शिक्षकों की चिंता बढ़ती जा रही है। हॉस्टल का स्थानांतरण न केवल छात्रों की शिक्षा को प्रभावित करेगा, बल्कि उनकी मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। सभी की निगाहें अब शासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

    मध्य प्रदेश में और समाचार पढ़ें

  • Murder: गोद लिए हुए बच्चे की हत्या के आरोपी नगर पालिका कर्मचारी बर्खास्त

    Murder: गोद लिए हुए बच्चे की हत्या के आरोपी नगर पालिका कर्मचारी बर्खास्त

    मध्य प्रदेश: नीमच नगर पालिका परिषद की महिला कर्मचारी की सेवा समाप्ति

    मध्य प्रदेश के भोपाल में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त ने नीमच नगर पालिका परिषद की एक महिला कर्मचारी को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई उस समय की गई जब यह स्पष्ट हुआ कि उक्त कर्मचारी ने अपनी जिम्मेदारियों का सही ढंग से पालन नहीं किया। इस मामले ने स्थानीय प्रशासन और नागरिकों के बीच एक नई चर्चा को जन्म दिया है।

    सूत्रों के अनुसार, यह महिला कर्मचारी काफी समय से अपनी ड्यूटी में लापरवाही बरत रही थी। उसके खिलाफ कई बार शिकायतें भी आई थीं। अधिकारियों ने कई बार उसे चेतावनी दी थी, लेकिन वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आई। अंततः, अब उसके खिलाफ यह कठोर कदम उठाया गया है, जो कि प्रशासन की ओर से एक स्पष्ट संदेश है कि लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    कारण और प्रशासन की प्रतिक्रिया

    इस बर्खास्तगी के पीछे कई कारण हैं। सबसे प्रमुख कारण है कार्य की अनियमितता और समय पर ड्यूटी पर न आना। इसके अलावा, महिलाओं के प्रति सम्मान और काम के प्रति जिम्मेदारी की भावना को बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि सभी कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों को समझें और उनका पालन करें।

    इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए आयुक्त ने कहा, “हम सभी कर्मचारियों से अपेक्षा करते हैं कि वे अपनी ड्यूटी को ईमानदारी से निभाएं। यदि कोई भी कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों को नजरअंदाज करता है, तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।” यह बयान प्रशासन की निष्ठा को दर्शाता है और यह दर्शाता है कि वे अपने कार्यों में पारदर्शिता और जिम्मेदारी को प्राथमिकता देते हैं।

    स्थानीय नागरिकों की प्रतिक्रिया

    नीमच नगर पालिका परिषद की महिला कर्मचारी की बर्खास्तगी पर स्थानीय नागरिकों की मिश्रित प्रतिक्रिया है। कुछ लोग इस कदम को सही मानते हैं, जबकि अन्य इसे अत्यधिक कठोर मानते हैं। एक स्थानीय निवासी ने बताया, “यह सही है कि काम को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। अगर कोई कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों को नहीं निभाता है, तो उसे इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।” वहीं, कुछ नागरिकों का मानना है कि बर्खास्तगी की जगह अन्य विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए था।

    बर्खास्तगी के प्रभाव

    इस बर्खास्तगी का प्रभाव केवल उस कर्मचारी पर ही नहीं, बल्कि पूरे नगर पालिका परिषद पर पड़ेगा। इससे अन्य कर्मचारियों में एक चेतना जागृत होगी और वे अपनी जिम्मेदारियों को और अधिक गंभीरता से लेंगे। यह कदम उन सभी के लिए एक सीख है जो अपने कार्य में लापरवाह हैं। इससे यह भी संकेत मिलता है कि प्रशासन अब सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है और किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं करेगा।

    इस घटना के बाद, नगर पालिका परिषद ने यह भी घोषणा की है कि वे अपनी कार्यप्रणाली को सुधारने के लिए कई नए उपायों पर विचार कर रहे हैं। इसके तहत, कर्मचारियों के लिए नियमित प्रशिक्षण और कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा, ताकि वे अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से समझ सकें।

    निष्कर्ष

    नीमच नगर पालिका परिषद की महिला कर्मचारी की बर्खास्तगी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासन अपने कार्यों में गंभीर है और वे कर्मचारियों की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेंगे। यह घटना न केवल नीमच में बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में एक संदेश पहुंचाती है कि सभी कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारियों को समझने और निभाने की आवश्यकता है। भविष्य में इस तरह के मामलों को रोकने के लिए प्रशासन को सक्रिय रहना होगा और कर्मचारियों को उचित मार्गदर्शन प्रदान करना होगा।

    आगे की कार्रवाई और सुधारात्मक उपायों की उम्मीद है कि इससे न केवल कर्मचारियों की कार्यप्रणाली में सुधार आएगा, बल्कि नागरिकों के प्रति सेवा की गुणवत्ता में भी वृद्धि होगी।

    MP News in Hindi

  • Vehicle News: पुराने वाहनों की बिक्री अब केवल अधिकृत डीलरों के पास होगी

    Vehicle News: पुराने वाहनों की बिक्री अब केवल अधिकृत डीलरों के पास होगी

    मध्य प्रदेश में पुरानी वाहनों की खरीद-बिक्री के लिए अनिवार्य ऑथराइजेशन

    मध्य प्रदेश में पुरानी वाहनों की खरीद-बिक्री करने वाले डीलरों के लिए अब परिवहन विभाग से **ऑथराइजेशन** प्राप्त करना अनिवार्य कर दिया गया है। यह निर्णय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अंतर्गत लिया गया है, जो कि केंद्रीय मोटरयान नियम, 1989 के नियम 55ए से 55एच के तहत लागू किया गया है। इस नए प्रावधान से वाहन स्वामियों को अब अपने पुराने वाहनों को बेचने के लिए केवल **अधिकृत डीलरों** के माध्यम से ही यह कार्य करना होगा।

    इस नियम के अनुसार, यदि कोई वाहन स्वामी अपना पुराना वाहन बेचना चाहता है, तो उसे पहले संबंधित आरटीओ को केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित फॉर्म 29सी के माध्यम से सूचना देनी होगी। सूचना देने के बाद, संबंधित ऑथराइज्ड डीलर को उस वाहन का **डीम्ड ओनर** (अस्थायी स्वामी) माना जाएगा और वह ही उस वाहन को आगे नए खरीदार को बेच सकेगा। इस प्रक्रिया से न केवल वाहन का स्वामित्व स्पष्ट होगा, बल्कि खरीद-बिक्री की प्रक्रिया भी सुगम बनेगी।

    डीलरों की जिम्मेदारियाँ और आवश्यकताएँ

    नए नियमों के तहत, डीलरों को वाहन से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेजों का संधारण, वाहन की सुरक्षा और किसी भी प्रकार की घटना की जिम्मेदारी उठानी होगी। ऑथराइज्ड डीलर **पंजीयन प्रमाण पत्र**, **फिटनेस प्रमाण पत्र**, **प्रदूषण प्रमाण पत्र**, **एनओसी** तथा स्वामित्व परिवर्तन से जुड़े आवेदन करने के लिए सक्षम होंगे। इस प्रकार, वाहन स्वामियों को अपनी पुरानी गाड़ियों की बिक्री के लिए अब किसी भी प्रकार की अतिरिक्त चिंता नहीं करनी पड़ेगी।

    डीलर को सुनिश्चित करना होगा कि वह वाहन को केवल निर्धारित प्रयोजनों के लिए ही सड़क पर चलाए। इनमें संभावित खरीदार को वाहन दिखाने के लिए सीमित ट्रायल, मरम्मत या सर्विस सेंटर तक ले जाना, तथा रजिस्ट्रेशन, फिटनेस या प्रदूषण प्रमाण पत्र से संबंधित कार्य शामिल हैं। यह प्रावधान न केवल खरीदारों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि डीलरों को भी जिम्मेदार बनाएगा।

    ऑथराइजेशन शुल्क और जीएसटी

    परिवहन विभाग के अनुसार, पुराने वाहनों की खरीद-बिक्री के लिए **ऑथराइजेशन** प्राप्त करने का शुल्क **25 हजार रुपए** तय किया गया है। इस प्रक्रिया में वाहन स्वामी को डीलर के माध्यम से वाहन बेचने पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। इसके अलावा, नियमों के पालन की स्थिति में वाहन के दुरुपयोग या दस्तावेजों की देखरेख से संबंधित जिम्मेदारी से वाहन स्वामी पूरी तरह मुक्त रहेगा। यह कदम वाहन स्वामियों को एक सुरक्षित और पारदर्शी बिक्री प्रक्रिया प्रदान करने के लिए उठाया गया है।

    ऑथराइज्ड डीलर को अपने अधिपत्य में मौजूद सभी वाहनों का रिकॉर्ड रखना होगा। इसके साथ ही, वाहन विक्रय से होने वाले लाभ पर **18% जीएसटी** देना होगा। प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए परिवहन विभाग ने एक ऑनलाइन पोर्टल की व्यवस्था की है, जिसके माध्यम से डीलर ऑथराइजेशन के लिए आवेदन कर सकेंगे और वाहन स्वामी फॉर्म 29सी के जरिए आरटीओ को सूचना दे सकेंगे। यह व्यवस्था डीलरों और वाहन स्वामियों दोनों के लिए समय की बचत करने में सहायक होगी।

    निर्धारित समय-सीमा और कानूनी कार्रवाई

    परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि पुराने वाहनों की खरीद-बिक्री करने वाले सभी डीलरों को निर्धारित समय-सीमा में ऑथराइजेशन लेना होगा। **1 जनवरी 2026** के बाद, यदि बिना पंजीकरण या ऑथराइजेशन के किसी भी डीलर द्वारा वाहन का क्रय-विक्रय किया गया, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ **सख्त कानूनी कार्रवाई** की जाएगी। यह प्रावधान सुनिश्चित करेगा कि सभी डीलर और वाहन स्वामी नियमों के अनुसार कार्य करें और किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी से बच सकें।

    इस प्रकार, नए नियमों के माध्यम से मध्य प्रदेश में पुरानी वाहनों की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया है। इससे न केवल वाहन स्वामियों को लाभ होगा, बल्कि डीलरों को भी एक स्पष्ट ढांचा मिलेगा, जिसमें वे अपने व्यापार को संचालित कर सकें। यह कदम निश्चित रूप से राज्य में सड़क परिवहन व्यवस्था को सुधारने में सहायक सिद्ध होगा।

    मध्य प्रदेश समाचार हिंदी में