Vehicle News: पुराने वाहनों की बिक्री अब केवल अधिकृत डीलरों के पास होगी

मध्य प्रदेश में पुरानी वाहनों की खरीद-बिक्री के लिए अनिवार्य ऑथराइजेशन मध्य प्रदेश में पुरानी वाहनों की खरीद-बिक्री करने वाले डीलरों के लिए अब परिवहन विभाग से **ऑथराइजेशन** प्राप्त करना अनिवार्य कर दिया गया है। यह निर्णय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अंतर्गत लिया गया है, जो कि केंद्रीय मोटरयान नियम,…

मध्य प्रदेश में पुरानी वाहनों की खरीद-बिक्री के लिए अनिवार्य ऑथराइजेशन

मध्य प्रदेश में पुरानी वाहनों की खरीद-बिक्री करने वाले डीलरों के लिए अब परिवहन विभाग से **ऑथराइजेशन** प्राप्त करना अनिवार्य कर दिया गया है। यह निर्णय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अंतर्गत लिया गया है, जो कि केंद्रीय मोटरयान नियम, 1989 के नियम 55ए से 55एच के तहत लागू किया गया है। इस नए प्रावधान से वाहन स्वामियों को अब अपने पुराने वाहनों को बेचने के लिए केवल **अधिकृत डीलरों** के माध्यम से ही यह कार्य करना होगा।

इस नियम के अनुसार, यदि कोई वाहन स्वामी अपना पुराना वाहन बेचना चाहता है, तो उसे पहले संबंधित आरटीओ को केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित फॉर्म 29सी के माध्यम से सूचना देनी होगी। सूचना देने के बाद, संबंधित ऑथराइज्ड डीलर को उस वाहन का **डीम्ड ओनर** (अस्थायी स्वामी) माना जाएगा और वह ही उस वाहन को आगे नए खरीदार को बेच सकेगा। इस प्रक्रिया से न केवल वाहन का स्वामित्व स्पष्ट होगा, बल्कि खरीद-बिक्री की प्रक्रिया भी सुगम बनेगी।

डीलरों की जिम्मेदारियाँ और आवश्यकताएँ

नए नियमों के तहत, डीलरों को वाहन से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेजों का संधारण, वाहन की सुरक्षा और किसी भी प्रकार की घटना की जिम्मेदारी उठानी होगी। ऑथराइज्ड डीलर **पंजीयन प्रमाण पत्र**, **फिटनेस प्रमाण पत्र**, **प्रदूषण प्रमाण पत्र**, **एनओसी** तथा स्वामित्व परिवर्तन से जुड़े आवेदन करने के लिए सक्षम होंगे। इस प्रकार, वाहन स्वामियों को अपनी पुरानी गाड़ियों की बिक्री के लिए अब किसी भी प्रकार की अतिरिक्त चिंता नहीं करनी पड़ेगी।

डीलर को सुनिश्चित करना होगा कि वह वाहन को केवल निर्धारित प्रयोजनों के लिए ही सड़क पर चलाए। इनमें संभावित खरीदार को वाहन दिखाने के लिए सीमित ट्रायल, मरम्मत या सर्विस सेंटर तक ले जाना, तथा रजिस्ट्रेशन, फिटनेस या प्रदूषण प्रमाण पत्र से संबंधित कार्य शामिल हैं। यह प्रावधान न केवल खरीदारों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि डीलरों को भी जिम्मेदार बनाएगा।

ऑथराइजेशन शुल्क और जीएसटी

परिवहन विभाग के अनुसार, पुराने वाहनों की खरीद-बिक्री के लिए **ऑथराइजेशन** प्राप्त करने का शुल्क **25 हजार रुपए** तय किया गया है। इस प्रक्रिया में वाहन स्वामी को डीलर के माध्यम से वाहन बेचने पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। इसके अलावा, नियमों के पालन की स्थिति में वाहन के दुरुपयोग या दस्तावेजों की देखरेख से संबंधित जिम्मेदारी से वाहन स्वामी पूरी तरह मुक्त रहेगा। यह कदम वाहन स्वामियों को एक सुरक्षित और पारदर्शी बिक्री प्रक्रिया प्रदान करने के लिए उठाया गया है।

ऑथराइज्ड डीलर को अपने अधिपत्य में मौजूद सभी वाहनों का रिकॉर्ड रखना होगा। इसके साथ ही, वाहन विक्रय से होने वाले लाभ पर **18% जीएसटी** देना होगा। प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए परिवहन विभाग ने एक ऑनलाइन पोर्टल की व्यवस्था की है, जिसके माध्यम से डीलर ऑथराइजेशन के लिए आवेदन कर सकेंगे और वाहन स्वामी फॉर्म 29सी के जरिए आरटीओ को सूचना दे सकेंगे। यह व्यवस्था डीलरों और वाहन स्वामियों दोनों के लिए समय की बचत करने में सहायक होगी।

निर्धारित समय-सीमा और कानूनी कार्रवाई

परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि पुराने वाहनों की खरीद-बिक्री करने वाले सभी डीलरों को निर्धारित समय-सीमा में ऑथराइजेशन लेना होगा। **1 जनवरी 2026** के बाद, यदि बिना पंजीकरण या ऑथराइजेशन के किसी भी डीलर द्वारा वाहन का क्रय-विक्रय किया गया, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ **सख्त कानूनी कार्रवाई** की जाएगी। यह प्रावधान सुनिश्चित करेगा कि सभी डीलर और वाहन स्वामी नियमों के अनुसार कार्य करें और किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी से बच सकें।

इस प्रकार, नए नियमों के माध्यम से मध्य प्रदेश में पुरानी वाहनों की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया है। इससे न केवल वाहन स्वामियों को लाभ होगा, बल्कि डीलरों को भी एक स्पष्ट ढांचा मिलेगा, जिसमें वे अपने व्यापार को संचालित कर सकें। यह कदम निश्चित रूप से राज्य में सड़क परिवहन व्यवस्था को सुधारने में सहायक सिद्ध होगा।

मध्य प्रदेश समाचार हिंदी में



Kapil Sharma

Kapil Sharma has worked as a journalist in Jagran New Media and Amar Ujala. Before starting his innings with Khabar 24 Live, he has served in many media organizations including Republic Bharat.

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