Study Alert: नई मुश्किल, प्रोफेसर बोले पढ़ाई और नैक ग्रेडिंग पर असर पड़ेगा

मध्य प्रदेश में छात्रों के लिए हॉस्टल आवास का संकट मध्य प्रदेश सरकार ने मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय (एमवीएम) सहित तीन सरकारी कॉलेजों के छात्रों को हॉस्टल से बाहर निकालने की योजना बनाई है। उच्च शिक्षा विभाग ने गोपाल कृष्ण गोखले हॉस्टल को संस्कृति विभाग के अधीन वीर भारत न्यास को सौंपने का निर्णय लिया है।…

मध्य प्रदेश में छात्रों के लिए हॉस्टल आवास का संकट

मध्य प्रदेश सरकार ने मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय (एमवीएम) सहित तीन सरकारी कॉलेजों के छात्रों को हॉस्टल से बाहर निकालने की योजना बनाई है। उच्च शिक्षा विभाग ने गोपाल कृष्ण गोखले हॉस्टल को संस्कृति विभाग के अधीन वीर भारत न्यास को सौंपने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के बाद छात्रों में चिंता का माहौल व्याप्त हो गया है, क्योंकि इससे उनकी पढ़ाई और आवास की स्थिति पर गंभीर असर पड़ेगा।

एमवीएम की प्राचार्य, डॉ. गीता मोदी ने मंगलवार को स्टाफ काउंसिल की बैठक बुलाई, जिसमें लगभग 65 प्रोफेसर शामिल हुए। करीब दो घंटे तक चली इस बैठक में सभी ने एकमत होकर निर्णय लिया कि राज्य शासन को पत्र लिखकर इस फैसले की समीक्षा करने की मांग की जाएगी। प्रोफेसरों का मानना है कि यह कदम छात्रों के लिए न केवल आवास की समस्या खड़ी करेगा, बल्कि उनकी पढ़ाई में भी बाधा डालेगा।

हॉस्टल की स्थिति और छात्रों का संकट

डॉ. गीता मोदी ने बताया कि वर्तमान में एमवीएम के पास केवल एक ही हॉस्टल बचा है, जिसमें शासकीय हमीदिया कॉलेज और शासकीय नवीन कॉलेज के 50 से अधिक छात्र रह रहे हैं। इस हॉस्टल की मासिक फीस मात्र **800 रुपये** है, और छात्रों को भोजन की व्यवस्था स्वयं करनी होती है। गोखले हॉस्टल के हस्तांतरण से इन छात्रों के सामने गंभीर आवासीय संकट उत्पन्न हो जाएगा।

  • वैकल्पिक व्यवस्था का प्रस्ताव – उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेज को सूचित किया है कि वर्तमान में संचालित गोखले हॉस्टल को संस्कृति विभाग के वीर भारत न्यास को सौंपने की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए शासन ने छात्र आवास के लिए किसी नए स्थानांतरण की व्यवस्था के लिए **29 दिसंबर** तक का समय मांगा है।
  • प्रोफेसरों की चिंता – स्टाफ काउंसिल की बैठक में प्रोफेसरों ने चिंता व्यक्त की कि हॉस्टल में मुख्यतः ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्र अध्ययन करते हैं। यदि उन्हें यह सुविधा छीन ली गई, तो उनकी पढ़ाई पर नकारात्मक असर पड़ेगा, जिससे कॉलेज की नैक ग्रेडिंग में सुधार की संभावनाएं भी खत्म हो जाएंगी। इसके परिणामस्वरूप, छात्र संख्या में भी कमी आएगी।

संस्थान की सुरक्षा को खतरा

बैठक में यह मुद्दा भी उठाया गया कि लाइब्रेरी के पीछे की जमीन पहले ही एमपी टूरिज्म को सौंपी जा चुकी है। इसके अलावा, उच्च शिक्षा विभाग के क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक कार्यालय के लिए भी कॉलेज परिसर की जमीन दी गई है। प्रोफेसरों ने चेतावनी दी कि यदि यह सिलसिला नहीं रुका, तो भविष्य में यह शैक्षणिक संस्थान बर्बादी की कगार पर पहुंच जाएगा।

एक लाइन में 3 हॉस्टल थे, अब एक भी नहीं बचेगा – छोटे तालाब किनारे एमवीएम के दो हॉस्टल (गोपाल कृष्ण गोखले हॉस्टल और मदन मोहन मालवीय हॉस्टल) हैं। वर्तमान में मालवीय हॉस्टल में शासकीय नवीन कॉलेज संचालित हो रहा है। गोखले हॉस्टल में पहले शासकीय श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज चलता था, लेकिन कॉलेज के कोलार स्थानांतरित होने के बाद यह हॉस्टल एमवीएम को वापस मिल गया था। अब इसे भी अन्य संस्थान को देने की तैयारी की जा रही है।

राज्य शासन को अवगत कराने की प्रक्रिया

गोखले हॉस्टल को लेकर शासन से प्राप्त पत्र के संबंध में स्टाफ काउंसिल की बैठक बुलाई गई थी। बैठक में लिए गए निर्णय को राज्य शासन के समक्ष रखा जाएगा। इस संदर्भ में डॉ. गीता मोदी ने कहा, “हम शासन को अपनी चिंताओं से अवगत कराएंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि छात्रों के हितों की रक्षा की जाए।”

इस प्रकार, एमवीएम के छात्र और शिक्षकों की चिंता बढ़ती जा रही है। हॉस्टल का स्थानांतरण न केवल छात्रों की शिक्षा को प्रभावित करेगा, बल्कि उनकी मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। सभी की निगाहें अब शासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

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Kapil Sharma

Kapil Sharma has worked as a journalist in Jagran New Media and Amar Ujala. Before starting his innings with Khabar 24 Live, he has served in many media organizations including Republic Bharat.

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