मध्य प्रदेश में केंद्रीय चुनाव आयोग की नई वोटर सूची में बड़े बदलाव
मध्य प्रदेश से एक महत्वपूर्ण खबर आई है, जहां केंद्रीय चुनाव आयोग ने मंगलवार को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के तहत प्रोविजनल ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की है। इस सूची में प्रदेश के लगभग 42.74 लाख मतदाताओं के नाम शामिल नहीं हैं। यह आंकड़ा प्रदेश की कुल 5 करोड़ 31 लाख 31 हजार 983 मतदाताओं की संख्या का लगभग 7.45% है। इस ड्राफ्ट में अधिकांश मतदाताओं के नाम कटने की संभावना जताई जा रही है।
इस सूची में एक महत्वपूर्ण बात यह सामने आई है कि महिलाओं के नाम पुरुषों की तुलना में अधिक संख्या में काटे गए हैं। इसका सीधा प्रभाव यह दर्शाता है कि पता बदलने, दस्तावेज अपडेट न होने और शहरी क्षेत्रों में सामूहिक कटौती के कारण महिलाएं अधिक प्रभावित हुई हैं। चुनाव आयोग ने उल्लेख किया है कि प्रदेश में 8 लाख 65 हजार 832 ऐसे मतदाता हैं, जिनसे संपर्क नहीं हो पाया है या जिनका डेटा 2003 की एसआईआर सूची से मेल नहीं खा पाया है।
प्रमुख जानकारी: वोटर लिस्ट में क्या है खास?
इस ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के बारे में जानने के लिए यहाँ कुछ महत्वपूर्ण बिंदु प्रस्तुत हैं:
- 42.74 लाख वोटर बाहर: प्रदेश के कुल 5 करोड़ 31 लाख 31 हजार 983 मतदाताओं में से 42 लाख 74 हजार 160 नाम शामिल नहीं हो सके।
- 23.64 लाख महिलाएं बाहर: ड्राफ्ट से बाहर होने वाले मतदाताओं में 23 लाख 64 हजार 531 महिलाएं हैं, जबकि पुरुषों की संख्या 19 लाख 9 हजार 315 है।
- 8.65 लाख वोटर्स का पता नहीं: चुनाव आयोग को 8 लाख 65 हजार 832 ऐसे मतदाता मिले हैं, जिनसे संपर्क नहीं हो सका या जिनका डेटा 2003 की SIR सूची से मेल नहीं खा पाया।
- इंदौर-भोपाल ज्यादा प्रभावित: इंदौर में 1.53 लाख नो-मैपिंग, 1.75 लाख अनुपस्थित एवं 1.97 लाख शिफ्टेड वोटर हैं। भोपाल में 1.16 लाख नो-मैपिंग, 2.86 लाख शिफ्टेड एवं 1.01 लाख अनुपस्थित वोटर हैं।
मतदाता नाम सूची में कैसे करें जांच?
बाहर रहने वाले मतदाता अपने नाम की जांच करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट voters.eci.gov.in पर जा सकते हैं या बीएलओ/मतदान केंद्र पर लगी सूची में देख सकते हैं। यदि किसी मतदाता का नाम 2003 में था लेकिन अब नहीं है, तो उन्हें घबराने की आवश्यकता नहीं है। मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी संजीव झा ने बताया कि इस ड्राफ्ट लिस्ट पर 23 दिसंबर से 22 जनवरी 2026 तक दावे और आपत्तियां की जा सकती हैं।
मतदाता जिनका नाम किसी कारण से छूट गया है, वे नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन सही पाए जाने पर उनका नाम जोड़ दिया जाएगा। इसके अलावा, जो मतदाता 1 जनवरी 2026 तक 18 वर्ष की आयु पूरी कर रहे हैं, वे फॉर्म-6 भरकर अपना नाम जुड़वा सकते हैं।
भोपाल में नई वोटर लिस्ट में गड़बड़ियां
भोपाल में एसआईआर के तहत जारी की गई नई मतदाता सूची विवादों में आ गई है। पहले यहां लगभग 21 लाख वोटर्स दर्ज थे, लेकिन नई सूची में 4 लाख से अधिक नाम काट दिए गए हैं। इसके बावजूद, कई डुप्लीकेट वोटर, मृत मतदाताओं के नाम और गलत मैपिंग की समस्याएं सामने आई हैं। कई पोलिंग बूथों पर अचानक 200 से 250 नए वोटर जोड़ दिए गए हैं, जिनमें कुछ ऐसे नाम भी हैं, जिनकी मौत पहले ही हो चुकी है।
इससे मतदाता भ्रमित हैं, क्योंकि कई वार्डों के नाम भी बदल दिए गए हैं। जिला प्रशासन का कहना है कि वोटर लिस्ट अभी अंतिम नहीं है, लेकिन यह सवाल उठता है कि जब बीएलओ घर-घर जाकर सर्वे कर चुके हैं, तो इतनी बड़ी गड़बड़ियां कैसे रह गईं? पुरानी वोटर लिस्ट में भोपाल के 21 लाख से अधिक वोटर 2029 पोलिंग बूथों पर दर्ज थे, जबकि अब बूथों की संख्या बढ़ाकर 2289 कर दी गई है।
गड़बड़ियों की सूची
नई वोटर लिस्ट में कई गड़बड़ियां सामने आई हैं, जैसे:
- नरेला विधानसभा के एलेक्जर ग्रीन कॉलोनी में रहने वाली अंजली गुप्ता का नाम पति का नाम, उम्र और पता एक जैसा होते हुए भी दो बार दर्ज किया गया है।
- दक्षिण-पश्चिम विधानसभा के भीम नगर में रहने वाले बल्लू राईन की मौत हो चुकी है, फिर भी उनका नाम पोलिंग बूथ 168 में दर्ज है।
- गोविंदपुरा विधानसभा के कैलाश नगर सेमरा कला पोलिंग बूथ पर पहले 650 वोटर थे, जिन्हें बीएलओ सत्यापित कर चुके थे। नई सूची में यहां अचानक 250 नए वोटर जुड़ गए हैं, जिनके बारे में बीएलओ को भी जानकारी नहीं है।
यह सभी गड़बड़ियां यह दर्शाती हैं कि मध्य प्रदेश में चुनाव प्रक्रिया को लेकर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। चुनाव आयोग को ऐसे मुद्दों के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने होंगे ताकि मतदाता को किसी प्रकार की दुविधा का सामना न करना पड़े।
मध्य प्रदेश की चुनावी स्थिति पर नजर बनाए रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये सभी परिवर्तन आगामी चुनावों पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं।






