Tax News: 1200 कॉलोनियों के परिवारों पर कर वापस लेने की मांग

मध्य प्रदेश: इंदौर में संपत्ति कर वृद्धि के खिलाफ सुनवाई का मामला मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश पर नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव प्रमोद शुक्ला ने मंगलवार को इंदौर में संपत्ति कर वृद्धि के प्रस्ताव को निरस्त करने के संबंध में एक महत्वपूर्ण सुनवाई की। इस सुनवाई में पूर्व पार्षद दिलीप कौशल अपने…

मध्य प्रदेश: इंदौर में संपत्ति कर वृद्धि के खिलाफ सुनवाई का मामला

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश पर नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव प्रमोद शुक्ला ने मंगलवार को इंदौर में संपत्ति कर वृद्धि के प्रस्ताव को निरस्त करने के संबंध में एक महत्वपूर्ण सुनवाई की। इस सुनवाई में पूर्व पार्षद दिलीप कौशल अपने अधिवक्ता जयेश गुरनानी के साथ उपस्थित हुए। इस मामले ने इंदौर के नागरिकों के बीच गंभीर चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि यह संपत्ति कर वृद्धि सीधे तौर पर 923 कॉलोनियों को प्रभावित कर रही है।

गुरनानी के अनुसार, वर्ष 2020 में मध्य प्रदेश सरकार ने एक राजपत्र जारी कर प्रत्येक जिले में संपत्ति कर के निर्धारण के लिए गाइडलाइन निर्धारित की थी। इसके तहत कलेक्टर को मौजूदा वित्त वर्ष में संपत्ति कर लेने या बढ़ाने के लिए दिशा-निर्देश दिए गए थे। हालांकि, इंदौर की भाजपा परिषद ने इन नियमों का पालन नहीं किया और संपत्ति कर में सीधे 10% की वृद्धि कर दी। इस निर्णय से इंदौर नगर निगम क्षेत्र की 923 कॉलोनियों के नागरिकों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है।

संपत्ति कर वृद्धि की प्रक्रिया पर सवाल

सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लिए कलेक्टर की गाइडलाइन में इन 923 कॉलोनियों में किसी प्रकार की वृद्धि नहीं की गई है। इसके अतिरिक्त, 146 नई कॉलोनियों का मूल्यांकन पहली बार किया जा रहा है, इसलिए उन पर संपत्ति कर बढ़ाना अनुचित साबित होता है। इसके अलावा, 184 कॉलोनियों की गाइडलाइन में 0% से 10% तक की वृद्धि होने के बावजूद सभी पर समान रूप से 10% संपत्ति कर बढ़ा दिया गया है।

इस सुनवाई में यह भी स्पष्ट किया गया कि इंदौर नगर निगम परिषद ने संवैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया, जिससे प्रत्येक करदाता के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। किसी भी करदाता को सुनवाई का अवसर न देकर संपत्ति कर राशि की निर्धारण स्लैब को 36,000/- से 25,000/-, 60,000/- से 45,000/- और 60,001/- से अधिक के स्थान पर 45,001/- कम कर दिया गया। इस बदलाव के कारण इंदौर के करदाताओं पर 25% से 50% तक का अतिरिक्त भार पड़ा है।

करदाताओं की चिंताएं और नगर निगम की भूमिका

दिलीप कौशल ने बताया कि इंदौर के 7.30 लाख करदाताओं द्वारा प्रति वर्ष करोड़ों रुपए शासन और नगर निगम को कर के रूप में दिए जाते हैं। इसके बावजूद, इंदौर शहर की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के आदेश (राजपत्र) के विपरीत नगर निगम इंदौर द्वारा की गई कर वृद्धि वास्तव में इंदौर की जनता के साथ एक खुली लूट है।

इस मामले पर इंदौर के नागरिकों में आक्रोश देखने को मिल रहा है। कई नागरिक संगठन और स्थानीय नेता भी इस मुद्दे को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं और नगर निगम द्वारा की गई कर वृद्धि के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह वृद्धि न केवल असंवैधानिक है, बल्कि यह गरीब और मध्यम वर्ग के लिए अत्यधिक बोझ डालती है।

  • इंदौर नगर निगम की नीति पर सवाल उठाते हुए नागरिकों ने मांग की है कि संपत्ति कर वृद्धि को तुरंत वापस लिया जाए।
  • पूर्व पार्षद दिलीप कौशल ने न्यायालय से निवेदन किया है कि इस मामले में उचित निर्णय लिया जाए ताकि करदाताओं के हक की रक्षा हो सके।
  • स्थानीय नागरिकों का मानना है कि नगर निगम को उनकी आर्थिक स्थिति का ध्यान रखना चाहिए और कर निर्धारण में पारदर्शिता लानी चाहिए।

निष्कर्ष

इंदौर में संपत्ति कर वृद्धि का मामला केवल एक आर्थिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों और उनकी आवाज को सुनने की आवश्यकता को भी उजागर करता है। नगर निगम को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वे करदाताओं के हितों की रक्षा करें और किसी भी प्रकार की वृद्धि को सही प्रक्रिया के तहत ही लागू करें। इस मामले पर उच्च न्यायालय का निर्णय महत्वपूर्ण होगा और इससे यह स्पष्ट होगा कि क्या नगर निगम की कार्रवाई वैध थी या नहीं।

मध्य प्रदेश में इस प्रकार के मुद्दों की बढ़ती संख्या से यह स्पष्ट होता है कि नागरिकों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना आवश्यक है। केवल तभी वे अपने हक की रक्षा कर सकेंगे और सरकार तथा स्थानीय निकायों से उचित सेवाएं प्राप्त कर सकेंगे।

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Kapil Sharma

Kapil Sharma has worked as a journalist in Jagran New Media and Amar Ujala. Before starting his innings with Khabar 24 Live, he has served in many media organizations including Republic Bharat.

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