मंदसौर जिले में प्लॉट विवाद से 40 परिवारों की परेशानियां बढ़ीं
मंदसौर जिले के दलौदा क्षेत्र में एक प्लॉट विवाद ने लगभग 40 परिवारों को गंभीर संकट में डाल दिया है। ये परिवार अपनी मेहनत की कमाई से प्लॉट खरीदने के बाद भी अपने मकानों का निर्माण करने में असमर्थ हैं। परिवारों का कहना है कि उन्होंने प्लॉट की रजिस्ट्री, नामांतरण और डायवर्सन जैसी सभी वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं, फिर भी उन्हें निर्माण कार्य करने से रोका जा रहा है। इस समस्या ने इन परिवारों के जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है।
पड़ोसी भू-स्वामी और कॉलोनी डेवलपर के बीच विवाद
पीड़ित परिवारों के अनुसार, दीपक कॉलोनी में एक कॉलोनाइजर और पड़ोसी भू-स्वामी के बीच लगातार विवाद उत्पन्न हो रहा है। जब भी प्लॉट धारक अपने निर्माण कार्य की शुरुआत करते हैं, उन्हें रोक दिया जाता है। इस दौरान उन्हें जान से मारने की धमकियां भी दी गईं हैं, साथ ही महिलाओं के साथ अभद्र भाषा में बात की गई है। इस तरह की घटनाओं ने क्षेत्र में तनाव का माहौल बना दिया है।
नागरिकों का कहना है कि 23 नवंबर 2025 को पुलिस की उपस्थिति में पटवारी ने सीमांकन कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे पीड़ित परिवारों में असंतोष और बढ़ता जा रहा है।
जनसुनवाई में की गई आवेदन, प्रशासन की चुप्पी
हाल ही में, इन पीड़ित परिवारों ने तहसीलदार कार्यालय के माध्यम से कलेक्टर को एक लिखित आवेदन सौंपा है, जिसमें उन्होंने विवादित भूमि का शीघ्र सीमांकन कराने और सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। आवेदन में संबंधित भूमि के खसरा नंबरों का उल्लेख करते हुए निष्पक्ष जांच की अपील की गई है।
पीड़ितों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया, तो विवाद और भी गंभीर रूप ले सकता है। क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन जल्द से जल्द कार्रवाई करेगा, ताकि वे अपनी खरीदी गई जमीन पर मकान बना सकें और उनके वैध अधिकारों की रक्षा हो सके।
तहसीलदार की प्रतिक्रिया और कार्रवाई का आश्वासन
इस मामले में दलौदा तहसीलदार वंदना हरित ने कहा कि उन्हें शिकायत प्राप्त हुई थी। इसके बाद उन्होंने जांच शुरू करते हुए सीमांकन के लिए एक दल गठित कर दिया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि एक सप्ताह के भीतर सीमांकन का कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
इस घटनाक्रम ने न केवल स्थानीय निवासियों को परेशान किया है, बल्कि यह मामला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाता है। प्रशासन की ओर से यदि समय पर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मामला और भी जटिल हो सकता है। स्थानीय लोग अब प्रशासन से यह उम्मीद कर रहे हैं कि उनके अधिकारों की रक्षा की जाएगी और उन्हें अपनी संपत्ति पर निर्माण कार्य करने की अनुमति दी जाएगी।
निष्कर्ष
दलौदा में चल रहे इस विवाद ने स्थानीय लोगों के जीवन को प्रभावित किया है और इससे निपटने के लिए प्रशासन की सक्रियता की आवश्यकता है। अगर समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो यह विवाद न केवल स्थानीय नागरिकों के लिए समस्या बनेगा, बल्कि यह कानून व्यवस्था को भी चुनौती दे सकता है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने में कितनी तत्परता दिखाता है।
इस प्रकार, मंदसौर जिले में चल रहे इस प्लॉट विवाद ने एक गंभीर सामाजिक मुद्दा खड़ा कर दिया है, जिसे प्रशासन को सुलझाने की आवश्यकता है। स्थानीय लोग अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं और उन पर प्रशासन की नजरें होंगी।






