नरसिंहपुर में मकर संक्रांति मेले की तैयारियों में प्रशासन की सक्रियता
मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में नर्मदा नदी के प्रसिद्ध बरमान घाट पर मकर संक्रांति के अवसर पर लगने वाले ऐतिहासिक मेले की तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन ने सक्रियता दिखाई है। हर वर्ष इस मेले में लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भीड़ उमड़ती है, ऐसे में इस बार भी प्रशासन ने व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए कई कदम उठाए हैं।
भूमि खाली कराने का प्रशासनिक प्रयास
शुक्रवार को तहसीलदार चंदन तिवारी के नेतृत्व में पुलिस प्रशासन की एक टीम बरमान घाट क्षेत्र में पहुंची, जहाँ उन्होंने जमीन खाली कराने की कार्रवाई शुरू की। प्रशासन की इस कार्रवाई को देखते हुए, वहां वर्षों से काबिज महिलाओं ने विरोध शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि वे इस भूमि पर पिछले 21 वर्षों से निवास कर रही हैं और यहीं खेती-बाड़ी कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं।
महिलाओं का विरोध और उनके दावे
विरोध कर रहीं महिलाओं का कहना है कि प्रशासन द्वारा बिना पूर्व सूचना के अचानक जमीन खाली कराने की कार्रवाई न केवल गलत है, बल्कि यह गरीब परिवारों के साथ अन्याय भी है। उनका कहना था कि यदि प्रशासन को भूमि की आवश्यकता है, तो उन्हें पहले नोटिस दिया जाना चाहिए और उनके पास मौजूद दस्तावेजों की जांच की जानी चाहिए। महिलाओं ने यह भी बताया कि उनके पास जमीन से संबंधित पट्टे और राजस्व दस्तावेज हैं, जो उनके दावे को समर्थन देते हैं।
तहसीलदार का स्पष्टीकरण
इस पूरे मामले पर तहसीलदार चंदन तिवारी ने स्पष्ट किया कि बरमान मेले के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं, जिससे यातायात और पार्किंग की समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इसी कारण वाहन स्टैंड के लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि जिन लोगों के पट्टे निरस्त हो चुके हैं, उन्हीं की जमीन खाली करवाई जाएगी।
नोटिस और स्थानीय लोगों की चिंताएं
तहसीलदार ने कहा कि संबंधित लोगों को जमीन खाली करने के लिए सात दिन का समय पहले ही दिया गया है। हालांकि, स्थानीय लोगों ने चिंता जताई है कि पट्टे निरस्त होने के बावजूद प्रशासन की कार्रवाई केवल गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों के खिलाफ की जा रही है, जबकि प्रभावशाली कब्जाधारियों पर कोई अनुशासनात्मक कदम नहीं उठाया गया है।
सामाजिक न्याय की मांग
महिलाओं के विरोध के बीच, यह स्पष्ट है कि प्रशासन को इस मुद्दे पर सोचने की आवश्यकता है। लोगों का मानना है कि बिना उचित प्रक्रिया के भूमि खाली कराना सामाजिक न्याय का उल्लंघन है। ऐसे में यदि प्रशासन को वास्तव में भूमि की आवश्यकता है, तो उन्हें पहले से तैयारी करके उचित प्रक्रिया अपनानी चाहिए।
निष्कर्ष
बरमान घाट पर लगने वाले ऐतिहासिक मेले की तैयारियों के बीच, प्रशासन और स्थानीय निवासियों के बीच का यह विवाद सामाजिक और कानूनी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। इस मामले में उचित समाधान निकालना आवश्यक है, ताकि श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों दोनों के हितों का सम्मान किया जा सके।






