Midday Meal: खंडवा की महिलाओं का अल्टीमेटम, 4 महीने से बिना वेतन, 22 से हड़ताल

खंडवा में स्व सहायता समूह की महिलाओं का सरकार के खिलाफ प्रदर्शन खंडवा जिले में सरकारी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में मध्यान्ह भोजन बनाने वाली स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने महिला एवं बाल विकास विभाग का घेराव किया है। महिलाओं ने शासन को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि उन्हें पिछले चार महीने…

खंडवा में स्व सहायता समूह की महिलाओं का सरकार के खिलाफ प्रदर्शन

खंडवा जिले में सरकारी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में मध्यान्ह भोजन बनाने वाली स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने महिला एवं बाल विकास विभाग का घेराव किया है। महिलाओं ने शासन को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि उन्हें पिछले चार महीने से रुके हुए भुगतान नहीं मिलते हैं, तो वे 22 दिसंबर से पूरे जिले और प्रदेश में ‘चूल्हा बंद’ आंदोलन शुरू करेंगी।

भुगतान न मिलने से परिवारों की आजीविका पर संकट

महिलाओं का कहना है कि शासन की पोषण योजनाएं उन्हीं के भरोसे चलती हैं। लेकिन लगातार चार माह से भुगतान न मिलने के कारण हजारों परिवारों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन की बेरुखी के कारण अब स्कूलों में बच्चों के भोजन का संकट उत्पन्न हो गया है।

आर्थिक दबाव ने महिलाओं को किया मजबूर

स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने बताया कि बच्चों का भोजन प्रभावित न हो, इसके लिए उन्होंने अपनी निजी बचत खत्म कर दी और कर्ज लेकर काम चलाया। राशन उधार लेने के चलते उन पर कर्ज बढ़ गया है। हालात यह हैं कि कर्जा चुकाने और राशन लाने के लिए कई महिलाओं ने अपने मंगलसूत्र और जेवर तक गिरवी रख दिए हैं। आर्थिक दबाव इतना बढ़ गया है कि अब आगे खाना बनाना संभव नहीं है।

खाना बनाने के बर्तन की कमी

महिलाओं ने यह भी बताया कि बर्तन मद की राशि भी अब तक पूरी तरह आवंटित नहीं की गई है। इससे कई स्कूलों और आंगनवाड़ियों में न तो खाना बनाने का सामान है और न ही परोसने के लिए बर्तन। पूरे सिस्टम में अव्यवस्था का आलम है। महिलाएं मांग कर रही हैं कि लंबित भुगतान के लिए तत्काल एक तारीख घोषित की जाए।

सरकार को दी गई चेतावनी

महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही भुगतान नहीं हुआ तो 22 दिसंबर से खंडवा जिले में चूल्हा बंद हड़ताल करना उनकी मजबूरी होगी। हड़ताल से होने वाली परेशानी की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। महिलाएं अपने हक के लिए लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं और उनका यह आंदोलन केवल उनके अपने और उनके बच्चों के भविष्य के लिए है।

स्व-सहायता समूह का महत्व

स्व-सहायता समूह ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का एक साधन बने हैं। ये समूह न केवल आर्थिक रूप से महिलाओं को सशक्त बनाते हैं, बल्कि समाज में उनकी स्थिति को भी मजबूत करते हैं। लेकिन जब शासन द्वारा इन समूहों को समय पर भुगतान नहीं किया जाता है, तो यह महिलाओं के लिए बड़े संकट का कारण बनता है।

समाज से अपील

स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने समाज से अपील की है कि वे उनके साथ खड़े हों और उनके इस आंदोलन का समर्थन करें। उन्होंने कहा कि यह केवल उनकी लड़ाई नहीं है, बल्कि यह सभी महिलाओं की लड़ाई है जो अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हैं।

भविष्य की योजनाएं

महिलाओं ने अपने भविष्य के लिए योजनाएं बनाई हैं और वे चाहती हैं कि शासन उन्हें समय पर भुगतान करें ताकि वे अपने कार्य को सुचारू रूप से जारी रख सकें। उनकी यह मांग केवल उनके लिए नहीं, बल्कि समाज के सभी वर्गों के लिए महत्वपूर्ण है।

इस प्रकार, खंडवा जिले की स्व-सहायता समूह की महिलाओं का यह आंदोलन शासन के लिए एक चेतावनी है। उन्हें अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि महिलाओं की इस कठिनाई को दूर किया जा सके और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।

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Kapil Sharma

Kapil Sharma has worked as a journalist in Jagran New Media and Amar Ujala. Before starting his innings with Khabar 24 Live, he has served in many media organizations including Republic Bharat.

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