भोपाल में एयर इंडिया के खिलाफ उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने एयर इंडिया लिमिटेड के खिलाफ एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। आयोग ने एयर इंडिया की सेवा में कमी को प्रमाणित मानते हुए आदेश दिया है कि वह एक यात्री के खाते से काटे गए 3,200 फ्रीक्वेंट फ्लायर अंक वापस करे। इसके साथ ही मानसिक प्रताड़ना के लिए एयर इंडिया को 10,000 रुपए और वाद व्यय के रूप में 5,000 रुपए अदा करने का भी निर्देश दिया गया है। यदि आदेश का पालन दो माह के भीतर नहीं किया गया, तो एयर इंडिया को उक्त राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
परिवाद का विवरण और यात्रा संबंधी समस्याएं
यह मामला भोपाल निवासी सुरेंद्र उपाध्याय द्वारा दायर किया गया था। सुरेंद्र उपाध्याय एयर इंडिया की फ्रीक्वेंट फ्लायर योजना के सदस्य हैं। उन्होंने 14 मार्च 2021 को अपने अर्जित अंकों का उपयोग करते हुए दिल्ली से भोपाल के लिए 6 मई 2021 की फ्लाइट का अवॉर्ड टिकट बुक किया था। लेकिन एयर इंडिया ने यात्रा की तिथि को कई बार बदला, पहले 21 अप्रैल को ई-मेल भेजकर 6 मई से 7 मई किया और फिर 30 अप्रैल को एक बार फिर से यात्रा तिथि को बदलकर 8 मई कर दिया।
बार-बार यात्रा तिथि बदलने के कारण सुरेंद्र उपाध्याय परेशान हो गए और उन्होंने 2 मई 2021 को एयर इंडिया को ई-मेल भेजकर टिकट निरस्त करने और पूरे अंक वापस करने की मांग की। उनका कहना था कि एयर इंडिया के नियमों के अनुसार फ्लाइट शेड्यूल में बदलाव होने पर बिना किसी पेनल्टी के टिकट निरस्त कर पूरा रिफंड दिया जाना चाहिए।
एकपक्षीय सुनवाई और एयर इंडिया का जवाब
हालांकि, एयर इंडिया ने न तो समय पर कोई जवाब दिया और न ही पूरा रिफंड किया। उलटे, उनके 3,200 अंक पेनल्टी के रूप में काट लिए गए। काफी समय बाद, अप्रैल 2022 में एयर इंडिया की ओर से जवाब आया, जिसमें टिकट को “नो-शो” मानते हुए रिफंड से इनकार कर दिया गया। इस प्रकार के रवैये के कारण सुरेंद्र उपाध्याय ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
आयोग के समक्ष एयर इंडिया की ओर से नोटिस तामील होने के बावजूद न तो कोई जवाब प्रस्तुत किया गया और न ही कोई दस्तावेज दाखिल किए गए, जिसके कारण मामले में एकपक्षीय सुनवाई हुई। आयोग की सदस्य डॉ. प्रतिभा पाण्डेय ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि यात्रा की तिथि बार-बार बदलना एयरलाइन की जिम्मेदारी थी और इसी कारण यात्री को टिकट निरस्त कराना पड़ा।
आयोग का आदेश और एयर इंडिया की जिम्मेदारी
आयोग ने अपने फैसले में कहा कि टिकट को “नो-शो” मानकर अंक न लौटाना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार प्रथा की श्रेणी में आता है। आयोग ने आदेश दिया कि एयर इंडिया को यात्री के कटे हुए 3,200 फ्रीक्वेंट फ्लायर अंक उसके खाते में वापस करने चाहिए। इसके अलावा, मानसिक कष्ट के लिए 10,000 रुपए और परिवाद व्यय के रूप में 5,000 रुपए अदा करने का निर्देश भी दिया गया है। तय अवधि में भुगतान न करने पर परिवाद दायर करने की तिथि से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि नोटिस तामील होने के बावजूद एयर इंडिया की ओर से कोई जवाब या दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए, इसलिए सुरेंद्र उपाध्याय द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और शपथपत्र के आधार पर एकपक्षीय निर्णय लिया गया। यह फैसला दिसंबर के पहले सप्ताह में सुनाया गया था।
सारांश
इस निर्णय से न केवल सुरेंद्र उपाध्याय को न्याय मिला है, बल्कि यह भी साफ होता है कि उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन सहन नहीं किया जाएगा। एयर इंडिया जैसे बड़े एयरलाइनों को अपने ग्राहकों के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान करने में तत्पर रहना चाहिए। इस प्रकार के मामलों में उपभोक्ता आयोग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है, जो उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करता है।






