सतना में ई-हाजिरी विवाद: शिक्षक वर्ग में बढ़ी नाराजगी
मध्य प्रदेश के सतना जिले में ई-हाजिरी को लेकर विवाद गहरा हो गया है। एक ओर जहाँ इसे शैक्षणिक अनुशासन के लिए अनिवार्य बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ शिक्षक इसे ‘बाध्यता और दखल’ मानते हुए इसका विरोध कर रहे हैं। इस विवाद का एक बड़ा उदाहरण मंगलवार को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिहरा क्रमांक-1 में देखने को मिला, जहाँ शिक्षकों ने अपनी चिंताओं को व्यक्त करने के लिए एक पत्र जारी किया।
पत्र में शिक्षकों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि उनका वेतन जारी नहीं किया गया और “घर में कोई अप्रिय घटना” होती है, तो इसके लिए आहरण-संवितरण अधिकारी जिम्मेदार होंगे। यह पत्र सामूहिक रूप से लिखा गया प्रतीत होता है, क्योंकि सूत्रों के अनुसार, पत्र की लेखन शैली और भाषा में समानता पाई गई है, जिससे इसे दबाव बनाने का एक प्रयास माना जा रहा है।
नवंबर से वेतन न मिलने से नाराज शिक्षक
नवंबर माह का वेतन इन शिक्षकों का ई-हाजिरी दर्ज न करने के कारण रोक दिया गया था। इस कारण से शिक्षकों में नाराजगी बढ़ गई है। जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने इस पत्र की भाषा को धमकीपूर्ण बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि ई-हाजिरी कलेक्टर के निर्देशों के तहत अनिवार्य है और इसका पालन न करने वाले शिक्षकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
शिक्षकों को एक अंतिम अवसर दिया गया है कि वे अपनी गलती सुधारें और ई-हाजिरी प्रक्रिया को शुरू करें। इस दौरान, शिक्षकों ने अपनी चिंताओं को व्यक्त करते हुए कहा कि यदि उन्हें समय पर वेतन नहीं मिलता है, तो यह उनके परिवारों पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा। उनका यह कहना है कि यह प्रक्रिया उनकी आजीविका के लिए महत्वपूर्ण है।
शिक्षकों को चेतावनी: कार्रवाई की जाएगी
बिहरा प्राचार्य को भेजे गए पत्र के आधार पर, उन शिक्षकों को चेतावनी दी गई है जिन्होंने ई-हाजिरी से इनकार किया और धमकी भरे शब्दों का प्रयोग किया। इनमें कई शिक्षक शामिल हैं, जैसे:
- अरविंद कुमार त्रिपाठी
- प्रशांत कुमार द्विवेदी
- वीरेन्द्र कुमार साकेत
- प्रेमलाल मिश्रा
- लक्ष्मी प्रसाद पांडेय
- वृंदावन तिवारी
- विमला सिंह
- अच्छेलाल साकेत
- ललिता सिंह
- प्रदीप कुमार तिवारी
- अनुज विश्वकर्मा
- प्रभा त्रिपाठी
- सुनीता सिंह
- सुमन त्रिपाठी
- सोमवती साकेत
- रामदीन साकेत
- द्रोपदी सिंह
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि ई-हाजिरी लागू रहेगी और वेतन का भुगतान इसी शर्त पर किया जाएगा। इस प्रकार, यह विवाद न केवल शिक्षकों के लिए बल्कि शिक्षा प्रणाली के लिए भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। शिक्षकों का कहना है कि उन्हें अपने कार्यों के लिए उचित सम्मान और अधिकार चाहिए।
शिक्षकों की चिंताएं और शिक्षा प्रणाली पर प्रभाव
शिक्षकों का यह मानना है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो इससे न केवल उनकी व्यक्तिगत आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी, बल्कि इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा। शिक्षकों का यह भी कहना है कि उन्हें अपनी समस्याओं के समाधान के लिए एक मंच की आवश्यकता है, जहाँ वे अपनी आवाज उठा सकें।
इस विवाद ने शिक्षा विभाग के भीतर भी चिंता पैदा कर दी है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मुद्दे का समुचित समाधान नहीं किया गया, तो इससे शिक्षा क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है। शिक्षा अधिकारियों को चाहिए कि वे शिक्षकों की चिंताओं को गंभीरता से लें और इस समस्या का समाधान निकालें।
इस प्रकार, सतना जिले में ई-हाजिरी के विवाद ने शिक्षकों के बीच एक नई बहस को जन्म दिया है, और यह देखा जाना बाकी है कि शिक्षा विभाग इस मामले को किस प्रकार सुलझाता है।






