सिवनी में आवारा कुत्तों का आतंक: लोगों में दहशत का माहौल
मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में इन दिनों आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है, जिसके चलते स्थानीय निवासियों में दहशत का माहौल बना हुआ है। डॉग बाइट के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। उल्लेखनीय है कि कुछ महीने पहले कान्हीवाड़ा थाना क्षेत्र में एक बच्ची पर आवारा कुत्तों के हमले के कारण उसकी मौत हो गई थी, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है।
कुत्तों के झुंड का हमला: रात में स्थिति और भी गंभीर
सिवनी की सड़कों पर दिन-रात आवारा कुत्तों के झुंड देखे जा सकते हैं। शाम होते ही ये कुत्ते अधिक आक्रामक हो जाते हैं और झुंड बनाकर लोगों पर हमला करने लगते हैं। इस स्थिति के कारण लोग रात में बाइक पर चलने से भी डरने लगे हैं, क्योंकि कुत्ते चलती बाइक पर भी झपट्टा मारने से नहीं चूकते। इस तरह की घटनाओं ने स्थानीय निवासियों को काफी चिंतित कर दिया है।
जिला अस्पताल में बढ़ती कुत्तों के काटने के मामलों की संख्या
नगर पालिका हर साल कुत्तों की धरपकड़ और नसबंदी के लिए अभियान चलाने का दावा करती है, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है। कुत्तों के काटने की घटनाएं केवल शहर में ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी बढ़ती जा रही हैं। जिला अस्पताल में ऐसे पीड़ितों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे स्पष्ट होता है कि नगर पालिका के प्रयास नाकाम साबित हो रहे हैं।
शहर के विभिन्न क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की समस्या
सिवनी के विवेकानंद वार्ड, शहीद वार्ड, बारापत्थर, बस स्टैंड, भैरोगंज, छिंदवाड़ा चौक, कटंगी रोड, शुक्रवारी, ज्यारतनाका, राजपूत कॉलोनी, काली चौक, मंगलीपेठ, मठ मंदिर और आजाद वार्ड जैसे क्षेत्रों में आवारा कुत्तों का जमावड़ा सबसे अधिक देखा जा रहा है। इन क्षेत्रों में कुत्तों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि लोग अपने घरों से बाहर निकलने में भी डरने लगे हैं।
नसबंदी अभियान की असफलता और प्रशासन की उदासीनता
आवारा कुत्तों को नियंत्रित करने के लिए चलाया गया नसबंदी अभियान भी अब तक बेअसर साबित हो रहा है। अभियान की शुरुआत में दावा किया गया था कि शहरी क्षेत्र में कुत्तों की संख्या को नियंत्रित किया जाएगा, लेकिन इसके लिए जो लाखों रुपये खर्च किए गए, उनका कोई असर नहीं दिख रहा है। इसके बावजूद, जिले और शहर में कोई ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है, जिससे लोगों का भय कम हो सके।
सीएमओ की प्रतिक्रिया: कुत्तों को पकड़ने के लिए नया अभियान
जिला अस्पताल से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में डॉग बाइट के मामलों में लगातार वृद्धि हुई है। जनवरी में 208, फरवरी में 208, मार्च में 219, अप्रैल में 240, मई में 257, जून में 250, जुलाई में 186, अगस्त में 152, सितंबर में 156, अक्टूबर में 165, नवंबर में 195 और दिसंबर में 235 मामले दर्ज किए गए। वहीं, जनवरी 2025 में यह संख्या 317 और फरवरी में 333 तक पहुंच गई।
नगर पालिका के सीएमओ विशाल सिंह मर्सकोले का कहना है कि कुत्तों को पकड़ने के लिए जल्द ही नया अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए एक टीम का गठन किया जाएगा ताकि इस समस्या का समाधान किया जा सके। शहरवासियों को उम्मीद है कि प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेगा और तत्काल उपाय करेगा।
समस्या की गंभीरता को देखते हुए यह आवश्यक है कि स्थानीय प्रशासन और नगर पालिका इस मुद्दे पर ध्यान दें और आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाएं। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो स्थिति और भी बिगड़ सकती है, जिससे लोगों की सुरक्षा को खतरा होगा।






