Bypass News: अयोध्या बायपास पर NGT के आदेश से पहले कटे आधे पेड़

मध्य प्रदेश में पेड़ों की कटाई को लेकर विवाद गहराया मध्य प्रदेश के अयोध्या बायपास पर पेड़ों को बचाने के लिए स्थानीय लोगों ने अर्द्धनग्न होकर प्रदर्शन किया है। यह प्रदर्शन उस समय हुआ जब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेशों के बावजूद नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (एनएचएआई) ने नगर निगम के माध्यम से…

मध्य प्रदेश में पेड़ों की कटाई को लेकर विवाद गहराया

मध्य प्रदेश के अयोध्या बायपास पर पेड़ों को बचाने के लिए स्थानीय लोगों ने अर्द्धनग्न होकर प्रदर्शन किया है। यह प्रदर्शन उस समय हुआ जब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेशों के बावजूद नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (एनएचएआई) ने नगर निगम के माध्यम से बायपास किनारे के आधे पेड़ों को काट दिया। इस कटाई में नगर निगम ने इतनी तेजी दिखाई कि उसने दिन-रात पेड़ों की कटाई में अपने अमले को झोंक दिया। अब पर्यावरण से जुड़े संगठनों ने इन पेड़ों को बचाने के लिए सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है।

इस बीच, बचे हुए पेड़ों का भविष्य 8 जनवरी को होने वाली एनजीटी की सुनवाई पर निर्भर करेगा। ज्ञात हो कि एनएचएआई भोपाल के अयोध्या बायपास को आसाराम चौराहा से रत्नागिरि तिराहे तक 836.91 करोड़ रुपये की लागत से 10 लेन में बदलने का कार्य कर रहा है, जो कि 16 किलोमीटर लंबा है। इस परियोजना के तहत बड़ी संख्या में पेड़ काटे जा रहे हैं, जिससे पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है।

पेड़ काटने की प्रक्रिया और एनजीटी का आदेश

यह परियोजना केंद्रीय सरकार द्वारा स्वीकृत है। पिछले साल दिसंबर में अयोध्या बायपास के चौड़ीकरण के लिए टेंडर जारी किया गया था और अन्य प्रक्रियाएँ पूरी की गई थीं। इसके बाद, एनएचएआई को पेड़ काटने के लिए सभी आवश्यक सरकारी अनुमतियाँ प्राप्त करनी थीं। चूंकि बायपास चौड़ीकरण का कार्य करने वाली एजेंसी और एनएचएआई के बीच एक एग्रीमेंट हुआ था, जिसके अनुसार पेड़ काटने की अनुमति प्राप्त करना एनएचएआई की जिम्मेदारी थी।

हालांकि, इस साल 11 अगस्त तक पेड़ काटने की अनुमति मिलनी थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसी बीच, मामला एनजीटी के पास चला गया। एनजीटी ने आदेश दिया कि शहरों में 25 से अधिक पेड़ काटने के लिए हाई लेवल कमेटी की अनुमति आवश्यक होगी। इसके बाद नगरीय विकास विभाग के एसीएस संजय शुक्ला की अध्यक्षता में एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया गया, जिसने पेड़ काटने की मंजूरी दी। जैसे ही कमेटी ने हरी झंडी दी, 21 दिसंबर से पेड़ों की कटाई शुरू कर दी गई।

पर्यावरणविदों का विरोध और प्रदर्शन

22 दिसंबर को जब कटाई का काम जारी रहा, तो याचिकाकर्ता नितिन सक्सेना ने फिर से एनजीटी का दरवाजा खटखटाया। हालांकि, एनएचएआई ने तब तक आधे से अधिक पेड़ काट दिए थे। अब पर्यावरणविदों ने इन बचे हुए पेड़ों को बचाने के लिए मुहिम छेड़ दी है। उन्होंने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए नाराजगी जताई और कहा कि एनएचएआई हरियाली को नष्ट कर रहा है।

पर्यावरणविदों का कहना है कि 10 लेन सड़क के निर्माण के लिए एनएचएआई को एलिवेटेड प्रोजेक्ट पर विचार करना चाहिए था, या फिर 10 की बजाय सिक्स लेन बनाने पर जोर देना चाहिए था। जिन पेड़ों को काटा जा रहा है, उनकी उम्र 40 से 80 साल के बीच है, जो हमारे पर्यावरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

एनएचएआई का दावा और कांग्रेस का विरोध

एनएचएआई ने अपनी तरफ से कहा है कि उसने सभी आवश्यक रिपोर्ट पेश कर दी थी, लेकिन एनजीटी ने उसे नहीं देखा, जिससे रोक लगी है। एनएचएआई का दावा है कि वह 7871 पेड़ों के बदले 81 हजार पौधे लगाने का काम करेगा।

इस बीच, कांग्रेस ने भी इस कटाई के खिलाफ प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेता अभिनव बरोलिया ने कहा कि इस कार्रवाई को तुरंत रोका जाना चाहिए। मंगलवार को कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रवीण सक्सेना और अन्य नेताओं ने भी मास्क पहनकर विरोध प्रदर्शन किया। पर्यावरणविद उमाशंकर तिवारी ने कहा कि पेड़ की उम्र 80 से 100 वर्ष है और उनके स्थान पर नए पौधे लगाने में वर्षों लगेंगे।

एनएचएआई के पौधारोपण योजना

एनएचएआई ने पेड़ काटने के बाद पौधारोपण की योजना भी बनाई है। इसके अनुसार:

  • 10 लेन सड़क बनाने के लिए कुल 7871 पेड़ काटे जाएंगे, और उनके स्थान पर 81 हजार पौधे लगाए जाएंगे।
  • 10 हजार पौधे अयोध्या बायपास के दोनों ओर लगाए जाएंगे, जिनमें छाया, फलदार एवं शेड-बेयरिंग प्रजाति के पौधे शामिल हैं।
  • नगर निगम के सहयोग से 10 हजार अतिरिक्त पौधों का रोपण किया जाएगा।
  • जिला प्रशासन द्वारा झिरनिया एवं जागरियापुर क्षेत्र में 61 हजार से अधिक पौधों का रोपण किया जाएगा।

इस प्रकार, मध्य प्रदेश में पेड़ों की कटाई और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर गहरा विवाद चल रहा है। 8 जनवरी को होने वाली एनजीटी की सुनवाई इस मामले में महत्वपूर्ण साबित होगी। पर्यावरण को बचाने के लिए स्थानीय लोगों और संगठनों की आवाज़ को सुनना अत्यंत आवश्यक है।

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Kapil Sharma

Kapil Sharma has worked as a journalist in Jagran New Media and Amar Ujala. Before starting his innings with Khabar 24 Live, he has served in many media organizations including Republic Bharat.

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