मध्यप्रदेश के अतिथि शिक्षकों का आंदोलन: सरकार की घोषणाओं पर नाराजगी
मध्यप्रदेश में कार्यरत अतिथि शिक्षकों ने सरकार की ओर से की गई घोषणाओं के पूरा न होने के कारण आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है। भोपाल में आयोजित प्रदेश स्तरीय बैठक में अतिथि शिक्षक समन्वय समिति ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि 25 जनवरी को प्रदेशभर में प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इस बैठक में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए शिक्षकों ने एकजुटता दिखाई और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का संकल्प लिया।
अतिथि शिक्षक समन्वय समिति के संस्थापक पी.डी. खैरवार के नेतृत्व में हुई इस बैठक में अध्यक्ष सुनील परिहार और अन्य पदाधिकारियों ने आंदोलन की रूपरेखा तय की। इसमें यह निर्णय लिया गया कि पहले संभागीय स्तर पर सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक शिक्षकों को इस आंदोलन में शामिल किया जा सके। यह कदम आंदोलन को व्यापक समर्थन देने के लिए उठाया जा रहा है, जिससे सरकार पर दबाव बनाया जा सके।
स्कूल शिक्षा मंत्री के बयान पर असंतोष
बैठक में वक्ताओं ने स्कूल शिक्षा मंत्री के हालिया बयान पर अपनी नाराजगी जाहिर की। मंत्री ने विधानसभा में कहा था कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा की गई घोषणाओं को पूरा करने में सरकार असमर्थ है। इस बयान ने शिक्षकों के बीच गहरा असंतोष पैदा कर दिया है। शिक्षकों का कहना है कि जब प्रदेश में भाजपा की सरकार है, तो घोषणाओं का पालन न होने का कारण समझ से परे है।
प्रदेश महासचिव चंद्रशेखर राय ने कहा कि यदि सरकार अपने वादों को निभाने में असमर्थ है, तो उसे स्पष्ट तरीके से मीडिया के सामने स्वीकार करना चाहिए कि घोषणाएं केवल झूठी थीं। उन्होंने कहा कि इस स्थिति में अतिथि शिक्षकों को आंदोलन करने की आवश्यकता नहीं होगी, लेकिन आधे अधूरे आश्वासनों से शिक्षकों का भविष्य अंधेरे में डाला जा रहा है।
कैबिनेट निर्णय से बढ़ा असमंजस
प्रदेश सचिव रविकांत गुप्ता ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हाल ही में लिए गए कैबिनेट निर्णय से अतिथि शिक्षकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है, जिसमें केवल तीन कैडर रखने और अन्य व्यवस्थाओं को समाप्त करने की बात कही गई है। वर्तमान में कई अतिथि शिक्षक 15 से 17 वर्षों से सेवा दे रहे हैं, लेकिन उन्हें स्थायी व्यवस्था में नहीं लाया जा रहा है।
अतिथि शिक्षकों का संगठन अब इस मुद्दे को लेकर और अधिक मुखर हो गया है। उन्होंने मांग की है कि उन्हें संविदा शिक्षक का दर्जा दिया जाए। नेताओं का कहना है कि वर्षों का अनुभव रखने वाले शिक्षकों को अस्थायी व्यवस्था में रखना न केवल अन्याय है, बल्कि इससे शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
मुख्यमंत्री से उम्मीदें
पदाधिकारी बी.एम. खान ने बताया कि जब मोहन यादव विधायक थे, तब उन्होंने स्वयं अनुभवी अतिथि शिक्षकों को संविदा शिक्षक बनाने की अनुशंसा की थी। अब जब वे मुख्यमंत्री बने हैं, तो शिक्षकों को उनसे उम्मीद है कि वे उनके भविष्य को सुरक्षित करेंगे। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो 31 जनवरी का प्रदर्शन और भी तेज किया जाएगा।
अंत में
मध्यप्रदेश के अतिथि शिक्षकों की यह स्थिति उनके भविष्य और शिक्षा प्रणाली के लिए चिंता का विषय है। यदि सरकार ने जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो यह आंदोलन व्यापक रूप से फैल सकता है। अतिथि शिक्षकों का यह संघर्ष न केवल उनके अधिकारों के लिए है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता के लिए भी महत्वपूर्ण है। शिक्षकों ने एकजुटता दिखाई है, और अब यह देखना है कि सरकार उनकी मांगों को लेकर किस प्रकार का सकारात्मक कदम उठाती है।






