बड़वानी में मकर संक्रांति की तैयारियाँ और पतंगबाजी का उत्साह
मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में मकर संक्रांति पर्व के आगमन के साथ ही पतंग विक्रेताओं में ख़ुशियाँ देखने को मिल रही हैं। इस बार चाइनीज मांझे पर लगाए गए प्रतिबंध के चलते कॉटन मांझे की बिक्री में **महत्वपूर्ण वृद्धि** हुई है। पतंगबाजी का यह पर्व बड़वानी में खासा लोकप्रिय है, और लोग इसे बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं।
जिला मुख्यालय के एक प्रमुख पतंग व्यापारी चमन गोले ने बताया कि चाइनीज मांझा अक्सर **खतरनाक** होता है, क्योंकि यह आसानी से नहीं कटता, जिससे कई बार लोगों को चोट लगने का खतरा रहता है। इसके विपरीत, कॉटन मांझा टूटने में आसान होता है और इसके उपयोग से सुरक्षा बढ़ती है। उन्होंने कहा कि अब लोग चाइनीज मांझे की जगह कॉटन मांझे को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे उनकी बिक्री में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध का प्रभाव
हालांकि, प्रशासन द्वारा चाइनीज मांझे की बिक्री पर रोक लगाने के बावजूद, कुछ स्थानों पर इसकी चोरी-छिपे बिक्री जारी है। इसको लेकर स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। यह चिंता का विषय है, क्योंकि चाइनीज मांझा न केवल पतंगबाजी को खतरनाक बनाता है, बल्कि यह अन्य लोगों की सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा करता है।
बड़वानी के बाजारों में मकर संक्रांति के मद्देनजर रंग-बिरंगी पतंगों की दुकाने सज गई हैं। यहाँ पर लोगों की भीड़ उमड़ रही है, और बच्चे-बड़े सभी इस मौके का भरपूर आनंद ले रहे हैं। मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा यहाँ के लोगों के लिए विशेष महत्व रखती है।
पतंगबाजी की रौनक और सुरक्षा उपाय
इस साल प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से चाइनीज मांझे की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। थाना प्रभारी दिनेश सिंह कुशवाह ने लोगों से अपील की है कि वे केवल देसी मांझे का उपयोग करें। उन्होंने विशेष ध्यान देने की सलाह दी है कि बिना मुंडेर वाली छतों, बिजली के तारों के पास, या सड़क पर खड़े होकर पतंगबाजी न करें। इससे न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि यह अन्य लोगों की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है।
विभिन्न स्थानों जैसे कि अयोध्या धाम मैदान, केंद्रीय स्कूल, डीआरपी लाइन और शहीद भीमा नायक शासकीय महाविद्यालय में लोग पतंग उड़ाने के लिए पहुँचते हैं। यहाँ पर मकर संक्रांति के अवसर पर पतंगबाजी का आयोजन बड़ी धूमधाम से होता है। स्थानीय बाजारों में साल भर का लगभग **80%** पतंग व्यापार केवल मकर संक्रांति के अवसर पर ही होता है।
पतंग उड़ाने का धार्मिक और स्वास्थ्य महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम ने सबसे पहले मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाई थी। इसे खुशी, आज़ादी और शुभता का प्रतीक माना जाता है। समाजसेवी अजीत जैन ने बताया कि पतंग उड़ाने से शरीर में विटामिन डी की पूर्ति होती है, मांसपेशियां मजबूत होती हैं, और यह आंखों के लिए भी लाभदायक है। इसके अलावा, पतंगबाजी व्यक्ति के मन को एकाग्र करने में भी सहायक होती है।
इस प्रकार, बड़वानी में मकर संक्रांति का पर्व न केवल सांस्कृतिक और धार्मिक महत्त्व रखता है, बल्कि इससे व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी संजीवनी मिलती है। लोग इस पर्व को मनाने के लिए बड़े उत्साह के साथ तैयार हैं, और यह स्थानीय समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है।
बड़वानी के लोग इस मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और इसके साथ ही सुरक्षा उपायों का पालन करना भी नहीं भूल रहे हैं।






