कटनी जिले में किसान की ‘मृत’ घोषित होने की अनोखी कहानी
मध्य प्रदेश के कटनी जिले से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहां एक किसान ने कलेक्टर के सामने अपना दुखड़ा सुनाया। रीठी तहसील के गुरजीकला गांव के निवासी किसान रामभरण विश्वकर्मा ने कलेक्टर के समक्ष आकर दावा किया कि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें ‘मृत’ घोषित कर दिया गया है। किसान ने भावुक होते हुए कहा, “साहब, मैं जीवित हूं, कहिए तो मरकर दिखाऊं?” इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसने सबका ध्यान आकर्षित किया है।
जांच में खुला राज: दादा जी की मृत्यु का असर
कलेक्टर आशीष तिवारी ने इस मामले को गंभीरता से लिया और तुरंत जांच के आदेश दिए। जांच के परिणामों ने मामला पूरी तरह से पलट दिया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि रामभरण विश्वकर्मा को व्यक्तिगत रूप से मृत घोषित नहीं किया गया है। दरअसल, किसान ने 250 क्विंटल धान बेचने के लिए जो पंजीकरण कराया था, वह उनके दादा रामनाथ बढ़ई के नाम पर था। रिकॉर्ड के अनुसार, उनके दादा जी की मृत्यु हो चुकी है, जिसके कारण पोर्टल पर रामभरण को ‘मृत’ दर्शाया जा रहा था। यही वजह थी कि उनका पंजीकरण स्वीकार नहीं किया गया।
कलेक्टर का आश्वासन: दोषियों पर होगी कार्रवाई
कलेक्टर आशीष तिवारी ने कहा कि किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने कहा, “मृत” घोषित करने वाले दावे और पंजीकरण असत्यापित होने के मामलों की जांच की जा रही है। अगर किसी कर्मचारी की लापरवाही सामने आई, तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य है कि किसी भी असली और पात्र किसान को अपनी फसल बेचने में कोई कठिनाई न हो।
खरीदी केंद्रों पर किसानों की बढ़ती बेचैनी
कलेक्ट्रेट पहुंचे अन्य किसानों ने भी अपनी समस्याएं कलेक्टर के सामने रखीं। किरहाई पिपरिया के सेवाराम और रामजी कोल जैसे किसानों ने बताया कि बिना किसी स्पष्ट कारण के उनके सैकड़ों क्विंटल धान का रकबा ‘असत्यापित’ कर दिया गया है। किसानों की मांग है कि यदि पंजीकरण में कोई तकनीकी गलती है, तो उसे सुधारने का मौका दिया जाए, ताकि उनकी मेहनत की फसल बर्बाद न हो।
कटनी में धान खरीदी की स्थिति
कटनी जिले में धान खरीदी की हालात अभी भी चिंताजनक हैं। वर्तमान में खरीदी की रफ्तार लक्ष्य से काफी पीछे है, जिससे किसानों में चिंता बढ़ रही है। प्रशासन को चाहिए कि किसानों की समस्याओं का शीघ्र समाधान करें ताकि वे अपनी फसल को सही समय पर बेच सकें। किसानों की मेहनत का उचित मूल्य मिलना आवश्यक है, जिससे वे आर्थिक रूप से मजबूत हो सकें।
निष्कर्ष: किसानों की स्थिति को सुधारने की आवश्यकता
इस मामले ने एक बार फिर से यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी रिकॉर्ड में तकनीकी गड़बड़ियों का सीधा असर किसानों की आजीविका पर पड़ सकता है। प्रशासन को चाहिए कि वह ऐसे मामलों की गंभीरता से जांच कर, किसानों को राहत प्रदान करे। किसानों के हक में उचित निर्णय लेने से न केवल उनकी समस्याओं का समाधान होगा, बल्कि कृषि क्षेत्र में भी सकारात्मक बदलाव आएगा।
कटनी जिले की यह घटना एक महत्वपूर्ण उदाहरण है कि कैसे प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुधार की आवश्यकता है ताकि किसानों को उनके अधिकार मिल सकें। किसानों की मेहनत और उनकी फसल की सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाए जाने की जरूरत है।
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