शोहरतगढ़ विधायक का विवाद: जान की धमकी और अवैध वसूली का मामला
रोहित सिंह | सिद्धार्थनगर – हाल ही में शोहरतगढ़ विधानसभा से संबंधित एक विवाद ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। यह मामला अब सिर्फ स्थानीय स्तर पर ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश विधानसभा और दिल्ली तक पहुंच चुका है। अपना दल (एस) के विधायक विनय वर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर यह आरोप लगाया है कि उन्हें एक नेपाली नागरिक से जान का खतरा है। उन्होंने इस मुद्दे को उत्तर प्रदेश विधानसभा में प्रमुखता से उठाया है, जो अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।
अवैध फीस वसूली की शिकायत से शुरू हुआ विवाद
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब गांधी आदर्श विद्यालय इंटर कॉलेज में छात्रों और अभिभावकों ने विधायक विनय वर्मा से शिकायत की कि कॉलेज प्रबंधन अवैध फीस वसूल रहा है। विधायक ने कॉलेज जाकर छात्रों की समस्याओं को सुना और इसके बाद जिलाधिकारी के माध्यम से जांच का आदेश दिया। जांच में कई अनियमितताएं सामने आईं, जिसके चलते विद्यालय प्रबंधन और प्रधानाध्यापक के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई।
हालांकि, इस जांच रिपोर्ट के प्रकाश में आने के बाद मामला अचानक पलट गया। विद्यालय प्रबंधन ने विधायक विनय वर्मा के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनकी विधायक निधि की जांच की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय में कर दी। इसके बाद, बस्ती मंडल के आयुक्त ने संयुक्त विकास आयुक्त को विधायक निधि की जांच के आदेश देने के लिए कहा। यह स्थिति विधायक के लिए तनावपूर्ण बन गई।
विधायक ने साजिश का आरोप लगाया
इस पूरी घटनाक्रम से आहत विधायक विनय वर्मा ने इसे एक साजिश करार दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर विद्यालय के प्रबंधक कुणाल प्रताप शाह की नागरिकता पर सवाल उठाए। विधायक का कहना है कि प्रबंधक नेपाली नागरिक हैं और प्रशासन के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर अपने प्रभाव का उपयोग कर रहे हैं।
यह मामला और भी गंभीर तब हुआ जब विनय वर्मा ने इसे विधानसभा में उठाया। उन्होंने सदन में कहा कि उन्हें एक नेपाली नागरिक से जान का खतरा है और यह भी सवाल उठाया कि जब उन्होंने 2022 से पीडब्ल्यूडी, सिंचाई विभाग और नगर पंचायत से जुड़ी जांच की मांग की, तब कोई कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन जैसे ही उन्होंने विद्यालय में अवैध वसूली का मुद्दा उठाया, उनकी विधायक निधि की जांच बैठा दी गई।
विधानसभा में उठाए गए मुद्दे
विधानसभा के अध्यक्ष ने जब विधायक से प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा, तो विनय वर्मा ने कहा कि उनके पास सभी प्रमाण हैं और वे जांच से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि उनकी विधायक निधि की पांच साल की जांच कराई जाए, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। विधायक ने यह भी कहा कि एक भारतीय नागरिक अपनी जांच करवा सकता है, लेकिन नेपाल में बैठा कोई नेपाली नागरिक किसी भारतीय विधायक की जांच कैसे कर सकता है, यह एक बड़ा सवाल है।
सुरक्षा की मांग और उच्चस्तरीय जांच की अपील
विधायक ने इस पूरे प्रकरण को गंभीर साजिश बताते हुए उच्चस्तरीय जांच और अपनी सुरक्षा की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस मामले में कार्रवाई न होने से यह स्पष्ट है कि कुछ लोग उनकी आवाज को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल, यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। विधानसभा में दिए गए बयान के बाद प्रकरण और संवेदनशील हो गया है। सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।
शोहरतगढ़ से जुड़े इस विवाद ने न केवल राजनीतिक हलचल पैदा की है, बल्कि यह स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाता है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या विधायक विनय वर्मा को उनकी जान का खतरा खत्म करने के लिए सुरक्षा प्रदान की जाएगी या नहीं।






