महोबा में किसानों की यूरिया खाद की कालाबाजारी के खिलाफ शिकायत
महोबा के बुधवारा गांव के किसानों ने जिलाधिकारी से यूरिया खाद की कालाबाजारी और निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर बिक्री की शिकायत की है। किसानों का कहना है कि पिछले कुछ समय से उन्हें यूरिया खाद की कमी का सामना करना पड़ रहा है, और उन्हें इस खाद के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। इस मुद्दे पर किसानों ने जिलाधिकारी से हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि उचित कार्रवाई की जा सके।
किसानों का आरोप है कि जैतपुर ब्लॉक के अटेंडेंस ऑफिसर दिनेश नायक ने अपने चहेते लोगों को 50-50 बोरी खाद वितरित की है, जबकि अन्य किसानों को यूरिया खाद अतिरिक्त शुल्क पर बेची जा रही है। इससे किसानों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है और उनकी उपज प्रभावित हो रही है। यह स्थिति किसानों के लिए अत्यंत चिंताजनक है, और उन्होंने इस पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
किसानों की शिकायतों पर कार्रवाई का न होना
किसानों ने बताया कि उन्होंने इस मामले में पहले भी कई बार शिकायतें की हैं और जांच टीम भी भेजी गई थी, लेकिन उन शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उनकी शिकायतें अनसुनी रह गईं, जिससे किसानों में निराशा और आक्रोश बढ़ता जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इस बार भी उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो वे और अधिक गंभीर कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे।
बुधवारा गांव के किसान चरन सिंह, पप्पू, जयसिंह, प्रमोद, परमेश्वरी दयाल और अजय सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे।
- किसानों ने ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की।
- उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उनके पास इस पूरे प्रकरण की वीडियो रिकॉर्डिंग और गवाह भी मौजूद हैं, लेकिन जांच टीम ने उन्हें अनदेखा किया।
- किसानों ने जिलाधिकारी से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है ताकि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
किसानों का आंदोलन की चेतावनी
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी शिकायतों का समाधान नहीं किया गया, तो वे आगे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं सहेंगे और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। यह घटना न केवल महोबा के किसानों के लिए, बल्कि पूरे प्रदेश के किसानों के लिए एक चेतावनी है कि उन्हें अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी होगी।
फिलहाल, अधिकारियों की ओर से इस शिकायत पर कोई ठोस जवाब नहीं मिला है। किसानों की स्थिति को देखते हुए यह आवश्यक है कि सरकार इस मामले को गंभीरता से लेकर उचित कार्रवाई करे। किसानों का यह आंदोलन यह दर्शाता है कि उन्हें अपनी समस्याओं का समाधान चाहिए और वे इसके लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।
इस स्थिति को देखते हुए यह आवश्यक है कि स्थानीय प्रशासन और सरकार इस मामले की गंभीरता को समझें और किसानों की समस्याओं का समाधान करें। किसानों की मेहनत और उनके हक के लिए यह लड़ाई केवल एक गांव की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की है। इस मुद्दे का समाधान न केवल किसानों के लिए, बल्कि कृषि क्षेत्र के विकास के लिए भी आवश्यक है।






