रायबरेली में आशा वर्कर्स का प्रदर्शन: जिलाध्यक्ष गीता मिश्रा को नजरबंद किया गया
आशीष कुमार श्रीवास्तव | रायबरेली
3 मिनट पहले
उत्तर प्रदेश के रायबरेली जनपद के ऊँचाहार क्षेत्र में आशा वर्कर्स की जिलाध्यक्ष गीता मिश्रा को लखनऊ विधानसभा के सामने होने वाले प्रदर्शन में शामिल होने से पहले ही उनके घर में नजरबंद कर दिया गया है। यह कार्रवाई उस समय की गई जब महिला आरक्षियों सहित पुलिसकर्मियों को उनके आवास पर तैनात किया गया। आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी विभिन्न मांगों के लिए पिछले एक सप्ताह से धरना प्रदर्शन कर रखा है।
आशा वर्कर्स की प्रमुख मांगें
आशा वर्कर्स एसोसिएशन ने 15 दिसंबर से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन शुरू किया था। इन कार्यकर्ताओं की मुख्य मांगों में शामिल हैं:
- उन्हें राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
- समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें राज्य कर्मचारियों के बराबर काम करना पड़ता है, लेकिन उनका वेतन नियमित रूप से नहीं मिलता। यह स्थिति उनके लिए अत्यंत चिंताजनक है।
वेतन की समस्याएं और सरकारी आश्वासन
आशा कार्यकर्ताओं के अनुसार, उन्हें हर महीने वेतन नहीं दिया जाता है, बल्कि यह भुगतान कभी-कभी तीन महीने में एक बार किया जाता है। इस दौरान, कभी एक महीने का वेतन मिलता है तो कभी दो महीने का। जब उन्होंने इस संबंध में अधिकारियों से बात की, तो उन्हें बताया गया कि सरकार से फंड मिलने पर ही वेतन जारी किया जाएगा। यह स्थिति कार्यकर्ताओं के मनोबल को गिरा रही है और उन्होंने इस पर चिंता व्यक्त की है।
सरकारी सुविधाओं की मांग
इसके अलावा, आशा कार्यकर्ताओं ने यह भी मांग की है कि उन्हें राज्य कर्मचारियों को दी जा रही सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उनकी यह मांग है कि सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाए ताकि उनके हक की रक्षा हो सके। कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि उनकी मांगे सही तरीके से नहीं मानी गईं, तो वे अपने आंदोलन को और तेज कर सकते हैं।
पुलिस कार्रवाई पर सवाल
गीता मिश्रा के घर में पुलिस की तैनाती को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि इस प्रकार की कार्रवाई लोकतंत्र में किसी भी व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन करती है। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि उन्हें शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगें उठाने का पूरा हक है। पुलिस द्वारा की गई यह कार्रवाई उन्हें अपनी आवाज उठाने से रोकने का प्रयास है।
भविष्य की योजनाएं
आशा वर्कर्स एसोसिएशन ने यह स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे आने वाले दिनों में प्रदर्शन को और व्यापक रूप देंगे। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर अपने हक के लिए लड़ने की अपील की है। इस स्थिति से न केवल आशा कार्यकर्ताओं को बल्कि उनके परिवारों को भी प्रभावित हो रहा है, जो उनकी आर्थिक स्थिति पर निर्भर हैं।
निष्कर्ष
रायबरेली में आशा वर्कर्स का यह प्रदर्शन न केवल उनके वेतन और नौकरी की सुरक्षा से संबंधित है, बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक मुद्दा भी है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या सरकार इन कार्यकर्ताओं की समस्याओं को गंभीरता से लेगी या उन्हें नजरअंदाज किया जाएगा। समय आ गया है कि सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाए ताकि आशा कार्यकर्ताओं का संघर्ष समाप्त हो सके और उन्हें उनका हक मिल सके।






