Meditation: विश्व ध्यान दिवस पर 150 देशों के 1.20 करोड़ लोगों ने किया सामूहिक ध्यान

उत्तर प्रदेश में वैश्विक ध्यान दिवस का आयोजन विश्व के सबसे बड़े सामूहिक ध्यान कार्यक्रम में **150 देशों** के **1 करोड़ 20 लाख** से अधिक लोगों ने भाग लिया। इस आयोजन में उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों के निवासियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। भारत के प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु, **गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर** की…

150 देशों के 1.20 करोड़ लोगों ने किया सामूहिक ध्यान:विश्व ध्यान दिवस पर श्री श्री रविशंकर के नेतृत्व में हुआ, कहा- ये अब आवश्यकता है

उत्तर प्रदेश में वैश्विक ध्यान दिवस का आयोजन

विश्व के सबसे बड़े सामूहिक ध्यान कार्यक्रम में **150 देशों** के **1 करोड़ 20 लाख** से अधिक लोगों ने भाग लिया। इस आयोजन में उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों के निवासियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। भारत के प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु, **गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर** की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम ने ध्यान और मानसिक कल्याण के महत्व को उजागर किया।

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष **2024** में विश्व ध्यान दिवस को मानसिक कल्याण और सामाजिक सद्भाव में ध्यान की भूमिका को रेखांकित करते हुए औपचारिक मान्यता दी थी। इस वर्ष का प्रमुख कार्यक्रम न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र ट्रस्टीशिप काउंसिल में आयोजित किया गया। इस अवसर पर राजनयिकों और वरिष्ठ अधिकारियों ने श्री श्री रवि शंकर की उपस्थिति में सामूहिक ध्यान का अभ्यास किया, जो कि पूरे विश्व में फैल गया।

सामूहिक ध्यान का प्रभाव

भव्य रैलियों और उत्सवों के विपरीत, इस आयोजन का प्रभाव इसके साझा मौन और सामूहिक ध्यान के अनुभव में निहित रहा। इस समारोह ने **60 से अधिक देशों** में विभिन्न पृष्ठभूमियों के लोगों को एक साथ लाने का काम किया। इसमें छात्रों, पेशेवरों, किसानों और जेलों में बंद कैदियों सहित सभी वर्गों के लोग शामिल थे। यह एक अद्वितीय अनुभव था, जिसने सभी को एक नई दिशा दी।

इस वैश्विक पहल को ध्यान और कल्याण पर एक विशेष अध्ययन की घोषणा से और गति मिली। विश्व ध्यान दिवस से ठीक पहले, **गैलप** और **द आर्ट ऑफ़ लिविंग** ने मिलकर इस ऐतिहासिक वैश्विक अध्ययन की शुरुआत की। इस सहयोग के तहत गैलप अपने **गैलप वर्ल्ड पोल** में ध्यान से जुड़े नए प्रश्नों को शामिल करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि ध्यान अलग-अलग व्यक्तियों में भावनात्मक स्वास्थ्य, जीवन संतोष और सामाजिक कल्याण से कैसे जुड़ा है। इस स्तर पर ऐसा तुलनात्मक और डेटा-आधारित अध्ययन पहले कभी नहीं हुआ।

तनाव और चिंता की बढ़ती समस्या

गैलप के हालिया शोध बताते हैं कि तनाव और चिंता जैसी नकारात्मक भावनाएं दुनिया भर में लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। यह स्थिति ऐसे व्यावहारिक और बड़े पैमाने पर अपनाए जा सकने वाले मानसिक स्वास्थ्य समाधानों की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ध्यान, जो कि भारत की प्राचीन आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है, आज अरबों लोगों को चिंता, थकान और सामाजिक तनाव से निपटने के लिए एक प्रभावी उपाय प्रदान कर सकता है।

गुरुदेव का संदेश

संयुक्त राष्ट्र कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गुरुदेव ने कहा, “ध्यान अब कोई विलासिता नहीं है, यह एक आवश्यकता है।” यह विचार अब राजनीतिक गलियारों से लेकर जमीनी स्तर के समुदायों तक गूंज रहा है। इस वैश्विक अध्ययन के परिणाम **दिसंबर 2026** में जारी होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि ये निष्कर्ष दुनिया भर में सार्वजनिक नीति, शिक्षा और कार्यस्थलों में कल्याण से जुड़ी पहलों को नई दिशा देंगे।

विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि सामूहिक ध्यान केवल एक अभ्यास नहीं है, बल्कि यह एक आंदोलन है जो मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्रांति ला सकता है। इसके माध्यम से लोग अपनी आंतरिक शांति को प्राप्त कर सकते हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। इस कार्यक्रम ने न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर ध्यान के प्रति जागरूकता बढ़ाई है।

निष्कर्ष

इस प्रकार, विश्व ध्यान दिवस का यह आयोजन एक महत्वपूर्ण कदम है जो न केवल लोगों को मानसिक स्वास्थ्य की ओर आकर्षित कर रहा है, बल्कि उन्हें एकजुट भी कर रहा है। सामूहिक ध्यान के इस अनुभव ने यह साबित कर दिया है कि एक साथ ध्यान करने से न केवल व्यक्तिगत स्तर पर बल्कि सामूहिक स्तर पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए, हम सभी को ध्यान की इस शक्ति को अपनाना चाहिए और इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।

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Kapil Sharma

Kapil Sharma has worked as a journalist in Jagran New Media and Amar Ujala. Before starting his innings with Khabar 24 Live, he has served in many media organizations including Republic Bharat.

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