Court: औरैया कोर्ट का फैसला, पति, ससुर व देवर को उम्रकैद

उतर प्रदेश: दहेज हत्या मामले में सुनाई गई सजा औरैया जिले की एक अदालत ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए आठ साल पुराने दहेज हत्या के मामले में दोषियों को सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश (प्रथम) पारुल जैन ने विवाहिता की हत्या के दोषी पति, ससुर और देवर को आजीवन कारावास की…

औरैया कोर्ट का फैसला, पति, ससुर व देवर को उम्रकैद:8 साल पुराने दहेज हत्या मामले में सुनाई गई सजा

उतर प्रदेश: दहेज हत्या मामले में सुनाई गई सजा

औरैया जिले की एक अदालत ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए आठ साल पुराने दहेज हत्या के मामले में दोषियों को सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश (प्रथम) पारुल जैन ने विवाहिता की हत्या के दोषी पति, ससुर और देवर को आजीवन कारावास की सजा दी है, जो समाज में दहेज प्रथा की गंभीरता को दर्शाता है।

यह मामला वर्ष 2017 का है, जब लखना (इटावा) निवासी सेवानिवृत्त पीएसी सीओ लखपत सिंह ने अपनी 22 वर्षीय बेटी पिंकी की शादी 23 जून 2017 को महेवा रोड (अजीतमल) निवासी जितेंद्र कुमार यादव उर्फ जीतू के साथ की थी। शादी के कुछ समय बाद ही ससुराल वालों ने पिंकी को दहेज में स्कॉर्पियो गाड़ी और 10 लाख रुपये की मांग को लेकर प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।

दहेज की मांग और संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु

विवाह के मात्र पांच महीने के भीतर, 21 नवंबर 2017 को पिंकी की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। उसके पिता लखपत सिंह ने आरोप लगाया कि उसकी बेटी को दहेज की मांग को लेकर अत्यधिक प्रताड़ित किया गया था। इस आधार पर, पुलिस ने दहेज हत्या और प्रताड़ना का मामला दर्ज किया।

अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे एडीजीसी चंद्रभूषण तिवारी ने न्यायालय में तर्क दिया कि विवाहिता की मौत एक गंभीर अपराध है और इसके लिए दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दहेज हत्या की यह घटना समाज के लिए एक काला धब्बा है और इसे समाप्त करने की आवश्यकता है।

अदालत का निर्णय और सजा का विवरण

अदालत ने पति जितेंद्र यादव, ससुर पदम सिंह और देवर अमित कुमार यादव को दोषी पाया। तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। इसके साथ ही, प्रत्येक दोषी पर 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। यह निर्णय इस बात का संकेत है कि न्यायालय दहेज हत्या के मामलों में सख्त रुख अपनाने के लिए तत्पर है।

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि वसूले गए अर्थदंड की आधी राशि पीड़िता के पिता लखपत सिंह को प्रदान की जाएगी। यदि दोषी जुर्माना नहीं भरते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त जेल की सजा काटनी होगी। इस मामले का निपटारा करने में आठ साल का समय लगा, जो न्यायिक प्रणाली में सुधार की आवश्यकता को दर्शाता है।

न्यायालय की प्रक्रिया और सुनवाई का महत्व

यह मामला जिले के 10 अलग-अलग न्यायालयों में स्थानांतरित होने के बाद अंततः अपर सत्र न्यायाधीश (प्रथम) पारुल जैन की अदालत में पहुंचा। यहां त्वरित सुनवाई के बाद अंतिम फैसला सुनाया गया। अदालत ने यह सुनिश्चित किया कि मामले की सुनवाई में कोई भी देरी न हो, जिससे पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।

फैसले के बाद, तीनों दोषियों को पुलिस हिरासत में लेकर जिला कारागार इटावा भेज दिया गया है। यह निर्णय न केवल पीड़ित के परिजनों के लिए न्याय की एक मिसाल है, बल्कि समाज में दहेज प्रथा के खिलाफ एक मजबूत संदेश भी है।

समाज पर दहेज प्रथा के प्रभाव

दहेज प्रथा एक ऐसी सामाजिक बुराई है, जो न केवल महिलाओं के जीवन को प्रभावित करती है, बल्कि समाज में भी असमानता को बढ़ावा देती है। इस मामले में सुनाए गए फैसले से यह स्पष्ट होता है कि न्यायालय इस बुराई के खिलाफ सख्त कदम उठाने के लिए दृढ़ है।

समाज के सभी वर्गों को इस निर्णय से प्रेरणा लेनी चाहिए और दहेज प्रथा के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए। महिलाओं के प्रति सम्मान और समानता की भावना को बढ़ावा देना आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

इस तरह के फैसले यह साबित करते हैं कि न्यायालय दहेज हत्या के मामलों को गंभीरता से लेता है और दोषियों को सजा देकर समाज में एक सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास कर रहा है।

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Kapil Sharma

Kapil Sharma has worked as a journalist in Jagran New Media and Amar Ujala. Before starting his innings with Khabar 24 Live, he has served in many media organizations including Republic Bharat.

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