लखनऊ में ए.जी. चर्च ने मनाया 100 साल का जश्न
लखनऊ के एम.जी. मार्ग स्थित ए.जी. चर्च में इस वर्ष क्रिसमस के अवसर पर एक विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। यह चर्च अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर रहा है, जिसे वरिष्ठ पादरी सैमी मथाई ने एक ‘अत्यंत गौरवपूर्ण’ क्षण बताया। पादरी मथाई ने बताया कि पिछले एक सदी से यह चर्च प्रेम, सेवा और विश्वास के माध्यम से समाज की सेवा कर रहा है।
पादरी सैमी मथाई ने अपने संदेश में क्रिसमस को ‘शांति के राजकुमार प्रभु यीशु मसीह के जन्म का पर्व’ बताया। उन्होंने बाइबिल के यशायाह 9:6 का हवाला देते हुए कहा कि “हमारे लिए एक बालक जन्मा है… और उसका नाम शांति का राजकुमार रखा जाएगा।” इस अवसर पर उन्होंने सभी के जीवन में सच्ची शांति, आनंद और आशा की प्रार्थना की।
प्रभु यीशु का संदेश: प्रेम और भाईचारा
चर्च के अन्य पादरियों, महेंद्र सिंह और अमित डेविड ने भी सभा को संबोधित किया। उन्होंने प्रभु यीशु मसीह को ‘शांति का राजा’ बताते हुए मत्ती 5:9 के बाइबिल वचन “धन्य हैं वे जो मेल कराने वाले हैं” का उल्लेख किया। उनके अनुसार, प्रभु यीशु का संदेश प्रेम, क्षमा और भाईचारे के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
पादरियों ने यह भी कहा कि प्रभु यीशु का जन्म केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह पूरे मानव समाज के लिए उद्धार और नई शुरुआत का संदेश है। उन्होंने लूका 2:14 में स्वर्गदूतों द्वारा की गई घोषणा “पृथ्वी पर शांति और मनुष्यों में परमेश्वर की प्रसन्नता” को आज भी प्रासंगिक बताया।
समाज में सद्भाव और भाईचारे का संदेश
कार्यक्रम के समापन पर, सभी पादरियों ने उपस्थित लोगों से अपील की कि वे इस क्रिसमस पर जरूरतमंदों की सहायता करें, दुखियों के साथ खड़े हों और अपने जीवन के माध्यम से प्रेम और शांति का संदेश फैलाएं। पादरी मथाई ने कहा, “हमारा उद्देश्य समाज में सद्भाव और भाईचारे को बढ़ावा देना है।”
इस विशेष अवसर पर, चर्च ने सभी उपस्थित लोगों को एकत्रित होकर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का अहसास कराया। पादरियों ने यह भी बताया कि प्रेम और भाईचारा ही वह मार्ग है, जो हमें एक बेहतर समाज की ओर ले जाएगा। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे इस पर्व को न केवल एक उत्सव के रूप में मनाएं, बल्कि इसे अपने जीवन में उतारें।
क्रिसमस का महत्व और संदेश
क्रिसमस केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह मानवता के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश लेकर आता है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि हम सभी को एक-दूसरे की सहायता करनी चाहिए और समाज में प्रेम और शांति का माहौल बनाना चाहिए। प्रभु यीशु के जन्म से हमें यह सीख मिलती है कि हम सभी को एकजुट होकर चलना है और एक-दूसरे की खुशियों और दुखों में सहभागी बनना है।
इस प्रकार, ए.जी. चर्च में मनाया गया 100 साल का जश्न न केवल धार्मिक आयोजनों का हिस्सा था, बल्कि यह समाज के लिए एक प्रेरणा स्रोत बनकर उभरा। सभी पादरियों ने एक स्वर में कहा कि हमें अपने जीवन में प्रभु यीशु के संदेश को आत्मसात करना चाहिए और इसे अपने आचार-व्यवहार में भी दिखाना चाहिए।
इस विशेष प्रार्थना सभा ने न केवल चर्च के सदस्यों को एकत्रित किया, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों को भी एक साथ लाने का कार्य किया। सभी ने मिलकर इस पर्व को मनाने का संकल्प लिया और समाज में प्रेम, शांति और भाईचारे का संदेश फैलाने की दिशा में कदम बढ़ाने का वादा किया।






