देवरिया में छात्राओं को परीक्षा से वंचित करने वाला मामला
अनुग्रह नारायण शाही | देवरिया – देवरिया जिले के रुद्रपुर स्थित पं. श्रीकृष्ण उपाध्याय महिला महाविद्यालय में बीएससी प्रथम वर्ष की 141 छात्राएं रसायन विज्ञान की परीक्षा में शामिल नहीं हो सकीं। इसका मुख्य कारण समर्थ पोर्टल से प्रवेश पत्र का जारी न होना रहा, जिसके चलते ये छात्राएं परीक्षा का हिस्सा नहीं बन पाईं। इस घटना ने महाविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
छात्राओं को प्रवेश पत्र न मिलने के कारण परीक्षा कक्ष में प्रवेश नहीं दिया गया, जिससे उनमें निराशा का माहौल फैल गया। कई छात्राओं ने महाविद्यालय प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अपने शैक्षणिक वर्ष के बर्बाद होने की आशंका जताई। यह घटना छात्राओं के लिए अत्यंत तनावपूर्ण स्थिति पैदा कर रही है।
प्रशासन की लापरवाही पर सवाल
महाविद्यालय प्रशासन ने इस मामले में सफाई देते हुए कहा कि इस वर्ष पं. दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने प्रवेश प्रक्रिया के दौरान समर्थ पोर्टल पर पंजीकरण के साथ परीक्षा फॉर्म भरना अनिवार्य किया था। इस प्रक्रिया के दौरान हुई तकनीकी गड़बड़ी के कारण बीएससी प्रथम वर्ष की 141 छात्राओं के प्रवेश पत्र समर्थ पोर्टल से जारी नहीं हो पाए।
नोडल अधिकारी और राजकीय महाविद्यालय इंदुपुर के प्राचार्य डॉ. उमा शंकर गुप्ता ने बताया कि यह तकनीकी समस्या गंभीर थी, जिससे छात्राएं परीक्षा में उपस्थित नहीं हो सकीं। उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे मामले की जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन को दे दी गई है और समाधान की प्रक्रिया जारी है।
छात्राओं के भविष्य को लेकर आश्वासन
महाविद्यालय के प्रबंधक मोहन उपाध्याय ने कहा कि उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति से इस विषय पर बातचीत की है। कुलपति ने छात्राओं के हितों को ध्यान में रखते हुए शीघ्र समाधान निकालने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि छात्राओं के भविष्य को कोई नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।
हालांकि, परीक्षा से वंचित छात्राएं फिलहाल मानसिक तनाव में हैं और विश्वविद्यालय प्रशासन के निर्णय का इंतजार कर रही हैं। छात्राओं और उनके अभिभावकों ने प्रशासन से भविष्य में ऐसी लापरवाही न होने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। यह घटना न केवल छात्राओं के लिए बल्कि पूरे शैक्षणिक वातावरण के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
समर्थ पोर्टल की तकनीकी समस्याएं
समर्थ पोर्टल का उपयोग केवल परीक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि विभिन्न शैक्षणिक प्रक्रियाओं के लिए भी किया जाता है। ऐसे में इस प्रकार की तकनीकी समस्याएं न केवल छात्राओं के लिए, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी गंभीर मुद्दा बन सकती हैं। छात्राएं इस मुद्दे को लेकर व्यापक स्तर पर जागरूकता फैलाने की कोशिश कर रही हैं, ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं का सामना न करना पड़े।
- छात्राओं की मांग: प्रशासन से कार्रवाई और समाधान की मांग
- प्रशासनिक लापरवाही: परीक्षा में शामिल न होने का मुख्य कारण
- समर्थ पोर्टल की तकनीकी समस्याएं: शैक्षणिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला मुद्दा
इस प्रकार, देवरिया के महाविद्यालय में हुई इस घटना ने न केवल छात्राओं को प्रभावित किया है, बल्कि यह पूरे शैक्षणिक प्रशासन पर भी निगरानी रखने की आवश्यकता को उजागर करता है। छात्राओं की भविष्य की उम्मीदें अब विश्वविद्यालय प्रशासन के निर्णय पर निर्भर करती हैं।
आगे की कार्रवाई और समाधान की प्रक्रिया पर सभी की नज़रें टिकी हुई हैं, ताकि छात्राओं को उनका हक मिल सके और उन्हें अपने शैक्षणिक वर्ष को बर्बाद नहीं होने दिया जाए।






