सिलावद में शासकीय भवनों की खंडहर में तब्दील होने की समस्या
मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के सिलावद कस्बे में स्थित कई रियासतकालीन शासकीय भवन अब खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। ये भवन बड़वानी जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित हैं और वर्षों से इनकी देखरेख के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है। नतीजतन, इन भवनों की स्थिति बेहद जर्जर हो गई है। इनकी खस्ताहाल स्थिति न केवल नगर की सुंदरता को प्रभावित कर रही है, बल्कि यह स्थानीय लोगों के लिए भी खतरनाक साबित हो सकती है।
पुराने थाना ग्राउंड का जर्जर भवन
सिलावद के पुराने पुलिस थाना ग्राउंड में स्थित एक विशाल भवन, जो कभी पुलिस थाना, बालक-बालिका छात्रावास, पशु चिकित्सालय और अन्य शासकीय कार्यालयों का केंद्र हुआ करता था, अब पूरी तरह खंडहर में बदल चुका है। नए भवनों के निर्माण के बाद इसे खाली कर दिया गया था, लेकिन लंबे समय से उपयोग न होने के कारण इसकी हालत दयनीय हो गई है।
कन्याशाला और पुलिस लाइन की बदहाली
पुराने थाना ग्राउंड के पास स्थित पुरानी कन्याशाला का भवन भी जर्जर अवस्था में है। इसके अलावा, मुख्य मार्ग पर स्थित पुलिस लाइन में सड़क के दोनों ओर बने रियासतकालीन आवासीय मकान भी खस्ताहाल हैं। इन भवनों की देखरेख में लापरवाही के चलते ये कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।
सांसद का संज्ञान और कलेक्टर को पत्र
राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेरसिंह सोलंकी ने सिलावद के इन रियासतकालीन भवनों की बदहाली पर गंभीरता से विचार किया है। उन्होंने कलेक्टर को पत्र लिखकर इन भवनों को तोड़कर नए निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए हैं। सांसद ने बताया कि पुराना थाना, सामुदायिक भवन, पुलिस लाइन, प्राइमरी स्कूल और सामुदायिक छात्रावास का रसोई केंद्र सभी खंडहर में तब्दील हो चुके हैं।
ट्राइबल स्टेट वेंडर मार्केट का प्रस्ताव
डॉ. सोलंकी ने मध्य प्रदेश आदिवासी वित्तीय विकास निगम को ट्राइबल स्टेट वेंडर मार्केट बनाने का प्रस्ताव भी भेजा है। यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो इससे सिलावद में एक आधुनिक और व्यवस्थित बाजार का विकास संभव हो सकेगा।
पार्किंग और ओपन मार्केट की योजना
इसके अलावा, शिवालय मंदिर से गायत्री मंदिर के बीच स्थित जर्जर प्राइमरी स्कूल और सरकारी आवास भवन को हटाकर मार्केट के सामने पार्किंग और ओपन मार्केट विकसित करने का भी प्रस्ताव है। पुराने थाना और उसके पीछे की लाइन को हटाने का प्रस्ताव भी वित्तीय विकास निगम विभाग को भेजा गया है, ताकि वहां एक सुसज्जित सामुदायिक भवन और छात्रावास का निर्माण किया जा सके। सांसद ने कहा कि वे इन सभी प्रस्तावों की स्वीकृति के लिए लगातार प्रयासरत हैं।
खाली होने वाली शासकीय भूमि का संभावित उपयोग
स्थानीय निवासियों का मानना है कि यदि इन खंडहर हो चुके भवनों को तोड़ा जाता है, तो लगभग 4 से 5 एकड़ शासकीय भूमि खाली हो जाएगी। इस भूमि पर नए शासकीय भवन, कार्यालय और कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जा सकता है, जो नगर के विकास में सहायक होगा।
पुलिसकर्मियों की आवास समस्या
ग्रामीणों ने बताया कि पुरानी पुलिस लाइन की खस्ताहाली के कारण वहां कोई भी पुलिसकर्मी नहीं रह रहा है। पुलिसकर्मी पिछले कई वर्षों से किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं। यदि पुराने भवनों को तोड़कर नए आवास बनाए जाएं, तो पुलिस जवानों की आवास समस्या का समाधान हो सकता है। लोगों का मानना है कि इन भवनों को हटाकर यदि कॉम्प्लेक्स, शासकीय कार्यालय और बाजार बनाए जाते हैं, तो इससे सिलावद का समग्र विकास होगा। साथ ही, दुकानों के निर्माण से स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
निष्कर्ष
सिलावद में शासकीय भवनों की देखरेख के अभाव में उनकी स्थिति गंभीर होती जा रही है। सांसद डॉ. सुमेरसिंह सोलंकी के प्रयासों से यदि यह पुनर्विकास संभव होता है, तो न केवल स्थानीय लोगों की समस्याओं का समाधान होगा, बल्कि यह कस्बे के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। अधिकारी और प्रशासन को इस दिशा में त्वरित कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि इन भवनों का पुनर्निर्माण किया जा सके और सिलावद का समग्र विकास हो सके।






