मध्य प्रदेश की राजनीति में दीपक जोशी की वापसी पर बवाल
मध्य प्रदेश में हाल ही में हुए एक विवाद के बाद पूर्व मंत्री दीपक जोशी ने एक बार फिर से सुर्खियाँ बटोरी हैं। 4 दिसंबर को महिला कांग्रेस की पूर्व प्रदेश सचिव पल्लवी राज सक्सेना से शादी करने के बाद, जोशी की राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने स्पष्ट रूप से यह कहा है कि दीपक जोशी की पार्टी में वापसी नहीं हुई है, जिससे उनके समर्थकों में निराशा का माहौल है।
शिवराज के सामने की थी वापसी का ऐलान
दीपक जोशी ने 6 मई 2023 को बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने का निर्णय लिया था। उन्होंने देवास जिले की खातेगांव सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद, बुधनी विधानसभा उपचुनाव के दौरान, जोशी ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने मंच पर बीजेपी में लौटने का ऐलान किया था, जिससे यह कयास लगाए जाने लगे थे कि वह पार्टी में फिर से शामिल होंगे।
बीजेपी के नेताओं ने किया स्पष्ट
हालांकि, अब बीजेपी ने दीपक जोशी की वापसी को लेकर स्थिति साफ कर दी है। देवास के भाजपा जिला अध्यक्ष राय सिंह सेंधव और पूर्व प्रदेश महामंत्री भगवानदास सबनानी ने बताया कि दीपक जोशी की सदस्यता का कोई औपचारिकता नहीं हुई है। राय सिंह सेंधव ने कहा, “दीपक जोशी को आज की तारीख में भारतीय जनता पार्टी संगठन ने सदस्यता ग्रहण नहीं कराई है। वे पार्टी के प्राथमिक सदस्य भी नहीं हैं।”
इसके साथ ही, भगवानदास सबनानी ने भी कहा कि जोशी की वापसी केवल चुनाव के समय सहयोग करने के लिए थी, लेकिन उनकी पार्टी में विधिवत वापसी नहीं हुई है। यह स्पष्ट करता है कि जोशी की राजनीतिक स्थिति को लेकर पार्टी में कोई सहमति नहीं बनी है।
दीपक जोशी की बीजेपी में वापसी की कोशिशें होती रहीं हैं
दीपक जोशी की बीजेपी में वापसी की कोशिशें कई बार की गई हैं, लेकिन हर बार कुछ न कुछ कारणों से यह संभव नहीं हो पाई। पिछले साल लोकसभा चुनाव के दौरान, 11 मार्च को जोशी की वापसी की बहुत चर्चा थी। उन्होंने दैनिक भास्कर से फोन पर कहा था कि “मैं तो सुबह का भूला हूं, शाम को घर लौट रहा हूं।” लेकिन इसके बाद भी उनकी वापसी नहीं हो पाई। उस दिन खुरई के पूर्व विधायक अरुणोदय चौबे और पन्ना की गुन्नौर के पूर्व विधायक शिवदयाल बागरी बीजेपी में शामिल हुए, जबकि दीपक जोशी ने बीजेपी ऑफिस नहीं पहुंचकर अपनी वापसी को अधर में डाल दिया।
कांग्रेस में शामिल होने के बाद की गई चुनावी चुनौती
दीपक जोशी ने कांग्रेस में शामिल होने के बाद से खातेगांव से विधानसभा चुनाव लड़ने की योजना बनाई थी। हालांकि, उन्होंने खुद को कभी इस सीट के लिए दावेदार नहीं बताया। इसके बावजूद, दिग्विजय सिंह और कमलनाथ ने जोशी को टिकट दिया और वह चुनाव हार गए। इस चुनाव में उन्हें आशीष शर्मा के खिलाफ 12,542 वोटों से हार का सामना करना पड़ा।
जोशी का कांग्रस में शामिल होना और उसके बाद के बयानों पर चर्चा
दीपक जोशी ने जब कांग्रेस में शामिल होने का निर्णय लिया, तब उन्होंने अपने पिता और पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कैलाश जोशी की तस्वीर लेकर पार्टी कार्यालय में सदस्यता ग्रहण की थी। इस मौके पर उन्होंने भाजपा सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि “प्रधानमंत्री मोदी जी ने कहा कि मैं न खाऊंगा न खाने दूंगा, लेकिन लगता है गूंगे-बहरों ने सुन लिया ‘खाओ और खाने दो’।” इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी और उनकी निष्ठा पर सवाल उठाए गए।
दीपक जोशी से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण बातें
- दीपक जोशी ने कांग्रेस में शामिल होने के दौरान अपने पिता की तस्वीर लेकर सदस्यता ग्रहण की।
- उनकी बीजेपी में वापसी की कोशिशें कई बार नाकाम हुई हैं, जिससे उनकी राजनीतिक भविष्यवाणियों पर सवाल उठ रहे हैं।
- जोशी का चुनावी सफर अब तक उतार-चढ़ाव से भरा रहा है, और उनकी राजनीतिक दिशा पर नजर रखना आवश्यक है।
इस स्थिति ने मध्य प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दिया है। दीपक जोशी की राजनीतिक यात्रा को लेकर जो प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं, वे यह दिखाती हैं कि राजनीतिक दलों में निष्ठा और वफादारी के मुद्दे कितने संवेदनशील होते हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि दीपक जोशी अपनी राजनीतिक पहचान को फिर से कैसे स्थापित करते हैं।






