Scrap News: बांका में वाहन स्क्रैपिंग नीति ठप, हजारों वाहन मालिक परेशान

बांका में वाहन स्क्रैपिंग नीति का कार्यान्वयन अधर में बिहार के बांका जिले में वाहन स्क्रैपिंग नीति का प्रभावी कार्यान्वयन अब तक नहीं हो पाया है। पुराने और अनुपयोगी वाहनों के निष्पादन के लिए जिले में कोई ठोस व्यवस्था न होने के कारण हजारों वाहन मालिकों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।…

बांका में वाहन स्क्रैपिंग नीति का कार्यान्वयन अधर में

बिहार के बांका जिले में वाहन स्क्रैपिंग नीति का प्रभावी कार्यान्वयन अब तक नहीं हो पाया है। पुराने और अनुपयोगी वाहनों के निष्पादन के लिए जिले में कोई ठोस व्यवस्था न होने के कारण हजारों वाहन मालिकों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति ने न केवल वाहन मालिकों को परेशान किया है, बल्कि प्रदूषण के बढ़ते स्तर में भी योगदान दिया है। जिले में अभी तक एक भी अधिकृत स्क्रैपिंग केंद्र स्थापित नहीं किया गया है, जिससे यह नीति धरातल पर उतरने से वंचित रह गई है।

केंद्र सरकार की पहल और राज्य का उदासीनता

केंद्र सरकार ने प्रदूषण फैलाने वाले और अनुपयोगी वाहनों के वैज्ञानिक निष्पादन के उद्देश्य से वाहन स्क्रैपिंग नीति लागू की थी। इस नीति के तहत, यदि कोई वाहन मालिक अपने पुराने वाहन को अधिकृत स्क्रैपिंग केंद्र पर नष्ट कराता है, तो उसे नई गाड़ी खरीदने में कर छूट और अन्य रियायतें प्रदान की जाती हैं। हालांकि, परिवहन विभाग ने राज्य के प्रत्येक जिले में स्क्रैपिंग केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया था, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण बांका में यह योजना अब तक धरातल पर नहीं उतर पाई है।

फिटनेस नियमों का कड़ाई से पालन

सरकार ने 15 वर्ष पुराने वाहनों के लिए सख्त फिटनेस नियम लागू किए हैं। यदि वाहन फिटनेस टेस्ट में फेल होता है, तो उसे स्क्रैप कराना अनिवार्य हो जाता है। इस स्थिति में बांका जिले में स्क्रैप सेंटर न होने के कारण वाहन मालिकों के सामने गंभीर चुनौतियाँ हैं। इसके परिणामस्वरूप, हजारों दोपहिया और चारपहिया वाहन घरों में बेकार पड़े हुए हैं।

परिवहन विभाग ने वर्ष 2021 में बिहार के कई जिलों में स्क्रैपिंग सेंटर स्थापित करने के लिए अधिसूचना जारी की थी, लेकिन बांका जिले को इसमें शामिल नहीं किया गया। इस अभाव के कारण वाहन मालिकों को अपने पुराने वाहनों का उचित मूल्य प्राप्त नहीं हो पा रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ रहा है।

कबाड़ व्यापारियों की बढ़ती मांग

बांका जिले के कई वाहन मालिक मजबूरन बाहरी जिलों से कबाड़ व्यापारियों को बुलाकर अपने पुराने वाहनों को औने-पौने दामों में बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, क्योंकि वे इस राशि का उपयोग नए वाहन खरीदने में नहीं कर पा रहे हैं। इस स्थिति ने वाहन मालिकों को एक और कठिनाई में डाल दिया है।

हालांकि सरकार ने अच्छी स्थिति में और फिटनेस टेस्ट पास करने वाले पुराने निजी वाहनों के लिए री-रजिस्ट्रेशन का विकल्प रखा है, जिसके तहत पांच साल के लिए पंजीकरण अवधि बढ़ाई जा सकती है, लेकिन यह विकल्प सभी वाहनों के लिए व्यावहारिक नहीं है।

जिले में स्क्रैपिंग सेंटर की आवश्यकता

इस संबंध में जिला परिवहन कार्यालय, बांका के मोटर वाहन निरीक्षक जितेंद्र कुमार का कहना है कि जिले में फिलहाल कोई स्क्रैप सेंटर नहीं है, और इसे खोलने को लेकर विभाग से कोई स्पष्ट मार्गदर्शन प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि विभाग की ओर से कोई पहल होती है, तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस स्थिति में वाहन मालिकों की परेशानी बनी रहना तय है।

निष्कर्ष: बांका में वाहन स्क्रैपिंग नीति का भविष्य

बांका जिले में वाहन स्क्रैपिंग नीति का कार्यान्वयन अभी भी एक चुनौती बना हुआ है। विभागीय उदासीनता और स्क्रैपिंग केंद्रों की कमी ने हजारों वाहन मालिकों को आर्थिक और मानसिक तनाव में डाल दिया है। यदि सरकार इस दिशा में जल्द ही ठोस कदम उठाती है, तो न केवल वाहन मालिकों को राहत मिलेगी, बल्कि इससे प्रदूषण स्तर में भी कमी आ सकती है।

बांका में स्क्रैपिंग नीति के सफल कार्यान्वयन के लिए जरूरी है कि सरकार और संबंधित विभाग इस दिशा में गंभीरता से विचार करें और एक ठोस योजना बनाएं। तभी जाकर वाहन मालिकों को अपनी समस्याओं का समाधान मिल सकेगा और वे नए वाहनों की खरीद में सक्षम हो सकेंगे।

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Kapil Sharma

Kapil Sharma has worked as a journalist in Jagran New Media and Amar Ujala. Before starting his innings with Khabar 24 Live, he has served in many media organizations including Republic Bharat.

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