समस्तीपुर में स्वास्थ्य कर्मियों की वेतन समस्या: 1800 से अधिक संविदा कर्मियों को तीन महीने से नहीं मिला वेतन
बिहार के समस्तीपुर जिले में स्वास्थ्य उप-केंद्रों और प्रखंड स्तरीय सरकारी अस्पतालों में कार्यरत 1800 से अधिक स्वास्थ्य विभाग के संविदा कर्मियों को पिछले तीन महीनों से अपना वेतन नहीं मिला है। इन कर्मियों का कहना है कि यह स्थिति न केवल उनके लिए बल्कि उनके परिवारों के लिए भी आर्थिक संकट का कारण बन गई है। आर्थिक परेशानियों के चलते कई कर्मियों को उधारी लेने की नौबत आ गई है, जिससे उनकी मानसिक स्थिति भी प्रभावित हो रही है।
संविदा कर्मियों ने अपनी स्थिति को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि अगर समय पर उनकी मांगों पर उचित निर्णय नहीं लिया गया, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत एएनएम से लेकर सुपरवाइजर स्तर तक के कर्मी शामिल हैं, जो अपनी सेवाएं बिना वेतन के देने को मजबूर हैं।
दीपावली पर भी वेतन की अनुपलब्धता ने बढ़ाई चिंता
संविदा कर्मियों ने बताया कि दीपावली जैसे महत्वपूर्ण पर्व पर जब नियमित (स्थायी) कर्मचारियों को समय पर वेतन मिल गया, तब NHM संविदा कर्मियों को अब तक उनका वेतन प्राप्त नहीं हुआ है। इस स्थिति के कारण उनमें भारी आक्रोश एवं निराशा व्याप्त है। कई कर्मियों ने बताया कि इस स्थिति के चलते उन्हें बैंक की EMI, बच्चों की शिक्षा शुल्क, मकान किराया, दवा और अन्य पारिवारिक आवश्यकताओं का भुगतान करना बेहद कठिन हो गया है।
लगातार वेतन न मिलने से कर्मियों का मनोबल टूट रहा है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है। स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए सरकार को शीघ्र इस समस्या का समाधान करना होगा।
संविदा कर्मियों की समस्याएं और संघ की मांगें
बिहार राज्य स्वास्थ्य संविदा कर्मी संघ के सदस्य आदित्यनाथ झा ने इस मुद्दे पर अपनी चिंता जताते हुए कहा कि NHM संविदा कर्मी राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं। कोरोना काल से लेकर नियमित स्वास्थ्य सेवाओं तक, संविदा कर्मियों ने हर परिस्थिति में निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य किया है। इसके बावजूद समय पर वेतन का भुगतान न होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि शीघ्र ही लंबित वेतन का भुगतान सुनिश्चित नहीं किया गया, तो संविदा कर्मियों में असंतोष और बढ़ेगा, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी। संघ ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि नव वर्ष से पूर्व सभी संविदा कर्मियों का लंबित वेतन अविलंब जारी किया जाए, ताकि वे आर्थिक संकट से उबर सकें और पूरी क्षमता के साथ स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान दे सकें।
संविदा कर्मियों की अपील: सरकार से सकारात्मक निर्णय की अपेक्षा
संविदा कर्मियों ने सरकार से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो न केवल उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है, बल्कि यह स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को भी प्रभावित करेगा। कर्मियों का यह भी कहना है कि उनके बिना स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन प्रभावित होगा, जिससे आम जनता को स्वास्थ्य सेवाओं में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।
इस मुद्दे पर स्थानीय प्रशासन को भी ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि स्वास्थ्य कर्मियों की मेहनत और समर्पण को नजरअंदाज न किया जाए। अगर सरकार समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं करती, तो इससे न केवल स्वास्थ्य कर्मियों का मनोबल टूटेगा, बल्कि इससे जनता के स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
निष्कर्ष
संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की यह स्थिति एक गंभीर मुद्दा है, जिसे तुरंत सुलझाने की आवश्यकता है। सरकार को चाहिए कि वह इन कर्मियों के प्रति संवेदनशीलता दिखाए और उनके साथ न्याय करे। केवल इसी प्रकार हम एक मजबूत और स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकते हैं।






