बिहार में सहरसा सदर अस्पताल में सुरक्षा चूक: ऑक्सीजन पाइप की चोरी
सहरसा सदर अस्पताल में एक गंभीर सुरक्षा चूक का मामला सामने आया है, जहां सुरक्षा व्यवस्था की कमी के कारण मरीजों की जान बचाने वाली ऑक्सीजन सप्लाई से जुड़ी तांबे की पाइप चोरी हो गई। यह घटना न केवल अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करती है। इस चोरी की घटना ने अस्पताल में हड़कंप मचा दिया और मरीजों के परिजनों में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।
चोरी की घटना की जानकारी
इस मामले में सदर अस्पताल के उपाधीक्षक एसएस मेहता ने मंगलवार की शाम को सदर थाना जाकर पुलिस को लिखित आवेदन दिया। उन्होंने अस्पताल परिसर में हो रही लगातार चोरी की घटनाओं पर रोक लगाने और रात में गश्ती बढ़ाने की मांग की। मेहता ने बताया कि यह चोरी की घटना अस्पताल के बच्चा वार्ड के पीछे हुई, जहां अज्ञात चोर पोस्टमॉर्टम रूम की ओर से ग्रिल के नट खोलकर अंदर घुसे और वहां लगे ऑक्सीजन सप्लाई के तांबे के पाइप को काटकर ले गए।
चोरी के समय की स्थिति
उपाधीक्षक ने बताया कि यह पाइप सीधे अस्पताल की ऑक्सीजन लाइन से जुड़ी थी, जिससे गंभीर मरीजों और नवजात बच्चों को ऑक्सीजन सप्लाई होती है। यदि यह चोरी पूरी तरह सफल हो जाती या रात के समय होती, तो मरीजों की जान पर खतरा मंडरा सकता था। चोरों ने जब पाइप काटने का प्रयास किया, तो वहां मौजूद गेट गार्ड को संदिग्ध आवाजें सुनाई दीं। जब गार्ड ने शोर मचाया, तो चोर तुरंत भाग निकले, लेकिन तब तक वे कुछ पाइप काटने में सफल हो चुके थे।
अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया
घटना के बाद अस्पताल प्रशासन की ओर से तत्काल ऑक्सीजन लाइन की जांच की गई ताकि मरीजों को कोई नुकसान न हो। उपाधीक्षक एसएस मेहता ने पुलिस से अनुरोध किया कि यदि रात में दो-तीन बार पेट्रोलिंग पार्टी अस्पताल परिसर का चक्कर लगाए, तो चोरों में भय का माहौल बनेगा और इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सकेगी। उन्होंने कहा कि अस्पताल में पहले भी छोटी-बड़ी चोरी की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन अब मामला मरीजों की जान से जुड़ गया है।
सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। सुरक्षा गार्ड की तैनाती और सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद चोरों ने इतनी आसानी से ऑक्सीजन पाइप काटकर ले जाने में सफलता प्राप्त की। स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों का कहना है कि रात के समय अस्पताल परिसर में असामाजिक तत्वों की आवाजाही आम बात हो गई है। कई बार चोरी और संदिग्ध गतिविधियों की शिकायत की गई, लेकिन ठोस कदम नहीं उठाए गए।
मामले की गंभीरता
ऑक्सीजन पाइप की चोरी को लोग केवल एक चोरी नहीं, बल्कि जानलेवा अपराध मान रहे हैं। बच्चा वार्ड और इमरजेंसी में भर्ती मरीजों के लिए ऑक्सीजन सप्लाई जीवन और मृत्यु का सवाल होती है। मरीजों के परिजनों ने चिंता जताते हुए यह सवाल उठाया है कि यदि किसी रात ऑक्सीजन सप्लाई अचानक बंद हो जाए और मरीज की मौत हो जाए, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
पुलिस की कार्रवाई
इस मामले पर सदर थाना प्रभारी शोएब अख्तर ने बताया कि अस्पताल प्रशासन की ओर से आवेदन प्राप्त हुआ है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जाएगी, और दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और संदिग्धों की तलाश की जा रही है।
जिला स्वास्थ्य प्रशासन की चुप्पी
घटना के बाद जिला स्वास्थ्य प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, अंदरखाने में अस्पताल प्रबंधन पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का दबाव बढ़ गया है। लोगों की चिंता यह है कि जब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक मरीजों की जान खतरे में बनी रहेगी।
जनहित का मुद्दा
यह घटना केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे जिले की स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करती है। अस्पताल परिसर की सुरक्षा बढ़ाने, रात में नियमित पुलिस गश्ती करने, सीसीटीवी कैमरों की निगरानी सख्त करने और अस्पताल में चोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है। जब तक ऐसे कदम नहीं उठाए जाते, तब तक मरीजों की जान खतरे में बनी रहेगी।






