गोपालगंज में थावे भवानी मंदिर में हुई चोरी का खुलासा
बिहार के गोपालगंज में स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल थावे भवानी मंदिर में हुई 1.08 करोड़ रुपए की चोरी का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। इस चोरी के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि उसके एक अन्य साथी की तलाश जारी है। पुलिस के अनुसार, यह चोरी पूरी तरह से पेशेवर तरीके से की गई थी और इसकी योजना आरोपी ने कई दिनों तक की थी।
चोरी की घटना का विवरण
17 दिसंबर की रात, चोरों ने थावे भवानी मंदिर के गर्भगृह में घुसकर मां दुर्गा की प्रतिमा से सोने-चांदी के हार, लॉकर में रखा मुकुट और अन्य बहुमूल्य आभूषण चुरा लिए थे। इसके साथ ही मंदिर परिसर में रखी लगभग 50 किलो वजनी दानपेटी भी चोर उठा ले गए थे। चोरी गए सामान की कुल कीमत करीब 1.08 करोड़ रुपए आंकी गई थी।
पुलिस की कार्यवाही और छापेमारी
पुलिस अधीक्षक अवधेश दीक्षित ने इस मामले की जानकारी देते हुए बताया कि चोरी के खुलासे के लिए 12 विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया था। पांच दिनों तक लगातार बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में छापेमारी की गई। तकनीकी साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल सर्विलांस के आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंची।
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के जमुनिया थाना क्षेत्र से आरोपी दीपक राय को हिरासत में लिया गया। पूछताछ के दौरान दीपक ने अपने अपराध को स्वीकार कर लिया।
आरोपी का आपराधिक इतिहास
पुलिस ने बताया कि दीपक राय एक पेशेवर मंदिर चोर है और उसका आपराधिक इतिहास काफी लंबा है। वह पहले भी कई मंदिरों में चोरी की घटनाओं में शामिल रहा है। मार्च 2025 में, उसने मध्य प्रदेश के महू जिले के शीतला माता मंदिर में चोरी की थी और उस मामले में वह जेल गया था। 13 नवंबर 2025 को वह जेल से छूटकर बाहर आया और फिर से चोरी की योजना बनानी शुरू कर दी।
चोरी की योजना और तैयारी
जेल से बाहर आने के बाद दीपक ने गोपालगंज के थावे मंदिर और पुणे के एक बड़े मंदिर की रेकी शुरू की। उसने गूगल सर्च के माध्यम से मंदिर के संरचना, गर्भगृह, मां दुर्गा के मुकुट और आभूषणों की पूरी जानकारी इकट्ठा की। पुलिस के अनुसार, दीपक ने मोबाइल में मंदिर से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी सर्च की थी, जिससे चोरी इतनी सटीक और योजनाबद्ध तरीके से की गई।
दीपक ने 10 और 11 दिसंबर की रात थावे मंदिर में खुद आकर रेकी की थी। उसने तय किया कि मंदिर में कहां से प्रवेश करना है, गर्भगृह तक कैसे पहुंचना है और चोरी के बाद सुरक्षित निकलने का रास्ता कौन-सा होगा।
चोरी की विधि और तरीके
चोरी की घटना को अंजाम देने के लिए दीपक और उसका साथी मंदिर के पीछे के एक अर्धनिर्मित मकान से रस्सी के सहारे मंदिर परिसर में दाखिल हुए। गर्भगृह में पहुंचकर मां दुर्गा के बहुमूल्य आभूषण और दानपेटी चोरी कर ली। घटना के बाद, आरोपी गांव के रास्तों से निकलते हुए अपने घर पहुंच गया।
चोरी के सामान की बरामदगी
पुलिस ने बताया कि दीपक ने चोरी के आभूषण अपने पास नहीं रखे थे, बल्कि उसने सभी कीमती गहने अपने दूसरे साथी को सौंप दिए थे। इस कारण अभी तक आभूषण बरामद नहीं हो सके हैं। पुलिस ने दीपक के पास से रॉड कटर, चोरी के समय पहने गए कपड़े, मोबाइल फोन (जिसमें थावे मंदिर की पूरी सर्च हिस्ट्री मिली), बाइक और बैग बरामद किए हैं।
आरोपी की मानसिकता और फिल्में
पुलिस अधीक्षक अवधेश दीक्षित ने बताया कि दीपक हमेशा मंदिरों को अपना टारगेट बनाता था और चोरी से पहले उसने कई चोरी से जुड़ी फिल्में देखी थीं। उसने खासकर एक बिहार आधारित मूवी देखी थी जिसमें पुलिस कैसे अपराधियों तक पहुंचती है, उसकी पूरी जानकारी थी।
दूसरे आरोपी की तलाश
पुलिस ने बताया कि दूसरे आरोपी की पहचान कर ली गई है और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही चोरी किए गए आभूषण भी बरामद कर लिए जाएंगे। इस चोरी के मामले में पुलिस की लापरवाही सामने आई है, जिसके कारण लापरवाह पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी।
इस प्रकार, गोपालगंज के थावे भवानी मंदिर में हुई चोरी की घटना ने न केवल स्थानीय लोगों को बल्कि पूरे बिहार को हिलाकर रख दिया है। पुलिस की तत्परता से इस मामले का खुलासा होना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन यह भी आवश्यक है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा प्रबंधों को और सख्त किया जाए।






