बांका में किसानों का भूमि अधिग्रहण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन
बिहार के बांका जिले के रजौन प्रखंड में खैरा मोड़ के निकट जीवनचक खिड़ी, खैरा और नरीपा मौजा के सैकड़ों किसानों ने अपनी उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण के खिलाफ एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में किसानों ने एकजुट होकर यह स्पष्ट किया कि यदि उनकी उपजाऊ भूमि का अधिग्रहण किया गया, तो यह उनके लिए आजीविका का गंभीर संकट उत्पन्न करेगा।
किसानों का कहना है कि यह भूमि उनके लिए न केवल आर्थिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह उनकी संस्कृति और परंपरा का भी अभिन्न हिस्सा है। मंगलवार को हुई इस बैठक में किसानों ने कहा कि लगभग 350 एकड़ दोफसली भूमि का सर्वेक्षण किया जा रहा है, जिस पर तीनों मौजा के सैकड़ों गरीब किसान निर्भर हैं। ऐसे में, यदि यह भूमि अधिग्रहित होती है, तो किसान भूमिहीन हो जाएंगे और उनकी रोजी-रोटी पर संकट आ जाएगा।
किसानों की चिंताएं: आजीविका और पर्यावरण
किसानों ने अपनी चिंताओं को साझा करते हुए कहा कि भूमि अधिग्रहण के कारण अनाज उत्पादन में कमी आएगी, जो केवल उनकी आजीविका नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की खाद्य सुरक्षा को भी प्रभावित करेगा। इसके साथ ही, पशु आहार जैसे पुआल और भूसा की भारी कमी हो सकती है, जिससे ग्रामीणों को पशुपालन में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
- किसानों ने यह भी चिंता जताई कि खेत, मेड़, बांध और खोरिया समाप्त होने से क्षेत्र का जलस्तर गिर सकता है, जिससे आसपास के गांवों में सिंचाई की समस्याएँ उत्पन्न होंगी।
- किसानों ने यह भी कहा कि फैक्ट्री के निर्माण से पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है, जिसका खामियाजा स्थानीय ग्रामीणों को भुगतना पड़ सकता है।
किसान आंदोलन की चेतावनी
बैठक में सभी किसानों ने एक स्वर में कहा कि वे उपजाऊ और सिंचाई से सक्षम भूमि का अधिग्रहण किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेंगे। इसके बजाय, उनकी मांग है कि यदि उद्योग स्थापित करना आवश्यक है, तो कम उपजाऊ या बंजर भूमि का चयन किया जाए। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया और उपजाऊ भूमि का अधिग्रहण किया गया, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे और इसे उग्र रूप दे सकते हैं।
किसानों ने यह भी कहा कि उनका संगठन मजबूत है और वे अपने अधिकारों के लिए अंतिम दम तक लड़ेंगे। इस बैठक में मुखिया प्रतिनिधि विष्णु कुमार, वार्ड सदस्य विमलेंदु भूषण सहित सैकड़ों किसान उपस्थित थे। किसानों की एकता और संघर्ष के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने इस मुद्दे को और भी महत्वपूर्ण बना दिया है।
समाज के इस महत्वपूर्ण हिस्से की मांगों और चिंताओं को समझना आवश्यक है, ताकि उनके अधिकारों की रक्षा की जा सके और उन्हें उचित समाधान प्रदान किया जा सके। यह मुद्दा न केवल किसानों के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए महत्वपूर्ण है।






