Bulldozer: यूपी में 27 करोड़ की सरकारी जमीन पर चला, 50 साल का कब्जा खत्म

सीतापुर में प्रशासन की सख्त कार्रवाई: 50 साल से अवैध कब्जा हटाया गया सीतापुर: उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में प्रशासन ने अवैध कब्जों के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की है। सदर तहसील क्षेत्र के विकास नगर कॉलोनी में लखनऊ–शाहजहांपुर मार्ग पर स्थित खलिहान की सरकारी भूमि से करीब 50 वर्षों से चला आ रहा…

27 करोड़ की सरकारी खलिहान भूमि पर चला बुलडोजर:सीतापुर में 50 साल से था कब्जा, कब्जेदार 1984 के आदेश से रजिस्ट्री का कर रहा दावा

सीतापुर में प्रशासन की सख्त कार्रवाई: 50 साल से अवैध कब्जा हटाया गया

सीतापुर: उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में प्रशासन ने अवैध कब्जों के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की है। सदर तहसील क्षेत्र के विकास नगर कॉलोनी में लखनऊ–शाहजहांपुर मार्ग पर स्थित खलिहान की सरकारी भूमि से करीब 50 वर्षों से चला आ रहा कब्जा हटाया गया। यह कार्रवाई तहसीलदार अतुल सेन सिंह की अगुवाई में नगर पालिका की टीम द्वारा की गई, जिसमें बुलडोजर की मदद से अवैध रूप से बनाई गई बाउंड्रीवाल को तोड़ दिया गया।

प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार, लगभग 2 बीघा 3 बिस्वा सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा किया गया था, जिसकी बाजार कीमत करीब 27 करोड़ रुपए आंकी जा रही है। लंबे समय से कब्जे में रहने के कारण यह जमीन निजी संपत्ति के रूप में उपयोग की जा रही थी, जिस पर बाउंड्री बनाकर घेराबंदी कर ली गई थी। इस कार्रवाई से क्षेत्र में प्रशासन की सख्ती को लेकर चर्चाएँ तेज हो गई हैं।

प्रशासन की कार्रवाई में सुरक्षा बलों की तैनाती

इस कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी पुलिस बल भी तैनात रहा, ताकि किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न न हो। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह भूमि राजस्व रिकॉर्ड में खलिहान के रूप में दर्ज है और इसे निजी संपत्ति में बदलने का कोई वैध आदेश या अनुमति मौजूद नहीं है।

प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि यह कदम कानून के शासन को बनाए रखने और सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा के लिए उठाया गया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसे कड़े कदमों से अवैध कब्जों पर नियंत्रण पाया जा सकेगा और सरकारी भूमि की रक्षा की जा सकेगी।

कब्जेदार का प्रतिक्रिया: वैधता का दावा

वहीं, कब्जेदार पवन कुमार बंसल ने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि उन्होंने वर्ष 1984 में इस खलिहान की जमीन को एसडीएम के आदेश के बाद आबादी में दर्ज कराया था। उनका कहना है कि इसके बाद उन्होंने मुरारका ब्रदर्स से 9 नवंबर 1998 को इस भूमि की रजिस्ट्री कराई थी और तभी से वे इसका उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने इसे पूरी तरह वैध बताते हुए प्रशासनिक निर्णय को गलत ठहराया।

कब्जेदार के इस दावे के बाद प्रशासन ने स्पष्ट किया कि प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि जमीन सरकारी है और इस पर किया गया निर्माण अवैध है। अधिकारियों ने बताया कि आगे भी सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा और किसी भी दबाव में आकर कार्रवाई रोकी नहीं जाएगी।

भविष्य में और भी कड़े कदम उठाने की योजना

सीतापुर प्रशासन ने यह भी कहा है कि वह भविष्य में भी ऐसे कड़े कदम उठाने की योजना बना रहा है। अधिकारियों ने बताया कि उनकी प्राथमिकता है कि सरकारी संपत्तियों की रक्षा की जाए और अवैध कब्जों को समाप्त किया जाए। प्रशासन की यह कार्रवाई न केवल कानून के शासन को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह अवैध गतिविधियों के खिलाफ एक सख्त संदेश भी है।

इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में प्रशासन की सख्ती को लेकर चर्चाएँ तेज हो गई हैं। स्थानीय नागरिक इस कदम का स्वागत कर रहे हैं और मानते हैं कि इससे क्षेत्र में कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। प्रशासन ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे सरकारी संपत्तियों की रक्षा में सहयोग करें और अवैध कब्जों के खिलाफ आवाज उठाएं।

कुल मिलाकर, सीतापुर में प्रशासन की यह कार्रवाई एक महत्वपूर्ण कदम है जो अवैध कब्जों पर नियंत्रण पाने और सरकारी संपत्तियों की रक्षा के लिए उठाया गया है। यह न केवल वर्तमान में, बल्कि भविष्य में भी प्रशासनिक सख्ती को दर्शाता है।

UP News in Hindi



Kapil Sharma

Kapil Sharma has worked as a journalist in Jagran New Media and Amar Ujala. Before starting his innings with Khabar 24 Live, he has served in many media organizations including Republic Bharat.

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